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सिलवानी नगर एवं ग्रामीण क्षेत्र में बिजली कंपनी की गजब बेपरवाही!

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कृष्ण कांत सोनी  सिलवानी रायसेन

सिलवानी नगर और आसपास के ग्रामीण इलाकों में बिजली कंपनी ने ऐसा “करंट” फैलाया है कि लोग देखते ही “शॉक्ड” हो जाएं! विद्युत ट्रांसफॉर्मर को बिना किसी सुरक्षा के, खुले में छोड़ दिया गया है।न तार की फेंसिंग, बस यूँ ही “आज़ाद पंछी” की तरह सड़कों पर रखे हैं। लगता है कंपनी ने सोचा, “क्यों न जनता को फ्री में करंट का मज़ा दिया जाए?” ये ट्रांसफॉर्मर नहीं, बल्कि “खुले आम मौत के न्योते” हैं, जो किसी भी दिन कोई बड़ा धमाका कर सकते हैं। लेकिन बिजली कंपनी को क्या? इनके लिए तो “सेफ्टी” सिर्फ़ अंग्रेजी का एक शब्द है, जिसका हिंदी में मतलब ढूंढना इनके बस की बात नहीं! नगर में थाने के पास, सुलभ के ठीक बगल में एक ट्रांसफॉर्मर खड़ा है।बिना फेंसिंग, बिना किसी सुरक्षा के, जैसे कोई “खुला जंगल का शेर”। सोचो, थाने के पास ही “कानून” की ऐसी धज्जियाँ उड़ रही हैं, तो बाकी जगह का क्या हाल होगा? फिर नूरपूरा रोड पर पुलिया के पास भी एक ट्रांसफॉर्मर “भीड़-भाड़ वाले इलाके” में मज़े से खड़ा है, जैसे कह रहा हो, “आओ भाई, करंट का स्वाद चखो!” यहाँ लोग आते-जाते हैं, बच्चे खेलते हैं, मूक जानवर मंडराते हैं, लेकिन बिजली कंपनी को लगता है, “सब ठीक है, टेंशन लेने का नहीं!” अब ग्राम साईंखेड़ा की बात करें तो वहाँ तो “हद ही हो गई”! हाइवे के ठीक बगल में ट्रांसफॉर्मर रखा है, बिना किसी सुरक्षा के, जैसे कोई “हाई-वोल्टेज वाला स्वागत द्वार”। ग्रामीण चिल्ला-चिल्ला कर कह रहे हैं, “भाई, ये डीपी नहीं, मौत की डीपी है!” लेकिन बिजली कंपनी के कानों पर जूं तक नहीं रेंगती। इनके लिए इंसान हो या जानवर, सब एक जैसे बस करंट का मज़ा लेते रहो, और कुछ नहीं चाहिए! जब इस “करंट अफ़ेयर” पर बिजली कंपनी के अधिकारी भूरेलाल शाक्य से बात की गई, तो उनका जवाब सुनकर हंसी भी आई और गुस्सा भी। बोले, “सब ट्रांसफॉर्मर सेफ हैं, कोई दिक्कत ही नहीं है!” अरे भाई, क्या आपकी आँखों पर पट्टी बंधी है, या आपने सेफ्टी का मतलब “खुले में रखना” समझ लिया है? लगता है, इनके लिए “सुरक्षा व्यवस्था” का मतलब है।ट्रांसफॉर्मर को सड़क पर पटक दो, और जनता को बोलो, “अपना ध्यान खुद रखो!” तो जनता से हमारा निवेदन है।सिलवानी में ट्रांसफॉर्मरों से दूर रहें, क्योंकि बिजली कंपनी का भरोसा तो बस एक ही है।”करंट लगेगा, तो देखा जाएगा!” वाह, क्या प्लानिंग है, क्या ज़िम्मेदारी है! सलाम है ऐसी “शॉकिंग” सोच को, जो हमें हर पल “चटपटा” एहसास दे रही है। अब बस इंतज़ार है कि कब कोई बड़ा “बिजली वाला धमाका” हो, और कंपनी कहे, “अरे, ये तो गलती से हो गया!”

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