रायसेन जिले में घर घर नल योजना ने तोड़ा दम
-जिले का पी एच ई विभाग सबसे नाकारा विभाग
-पाइपलाइन कई जगह खुली पड़ी है
मुकेश साहू दीवानगंज रायसेन
रहिमन पानी राखिए, बिन पानी सब सून, पानी गए न ऊबरे, मोती मानुष चून। रहीम का यह दोहा गर्मी की तपिश बढ़ते ही सांची विकासखंड के अंतर्गत आने वाले कई गावों में सच साबित होने लगा है। विकास के नाम पर लाखों-करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी सरकार ग्रामीण क्षेत्र के लोगों की प्यास बुझाने में नाकाम रही है। लोग बूंद-बूंद पानी के लिए इधर उधर भटक रहे हैं। गर्मी का पारा चढ़ते ही कई गांवों मे जल संकट गहराने लगे हैं। आम व्यक्ति से लेकर खास व्यक्ति तक सभी पीने के पानी को लेकर काफी चिंतित रहने लगे हैं। कई जगह तो लोग बूंद-बूंद पानी के लिए लोग तरस रहे हैं। गर्मी का मौसम परवान चढ़ते ही लोगों का कंठ सूखने लगा है।
वही सांची विकासखंड के अंतर्गत आने वाली पंचायत शाहपुर के गांव मादा में पानी के लिए हाहाकार मचा हुआ है। मादा मैं रहने वाले ग्रामीनो ने बताया कि करीब 200-250 फीट नीचे पानी पहुंच गया हैे ग्राम पंचायत शाहपुर के ग्राम मादा टोला में 2 वर्ष से पहले नल जल योजना के तहत पाइपलाइन डाली गई थी। एक-दो दिन ही चलकर बंद हो गई है। जब से नल जल योजना कि पाइप लाइन डाली है तब अभी तक पानी नहीं आया है।

जगह-जगह से नलजल की पाइप लाइन भी खुली हुई पड़ी है। गांव में एक ही हैंडपंप हे उसमें में भी पानी नहीं आ रहा है। गांव कि महिला संगीता बाई ,रईसा बी, खिम्मों बाई, कलाबाई , आदि ने बताया कि अभी तो गर्मी ही चालू नहीं हुई है और हम लोग परेशान होने लगे हैं 4 महीने गर्मी के हम कैसे निकालते हैं या हम ही जानते हैं शासन प्रशासन के कर्मचारी आश्वासन देकर चले जाते हैं। मगर काम कोई भी नहीं करता है जिससे हम ग्रामीण कई वर्षों से परेशान होते चले जा रहे हैं।
केंद्र और राज्य सरकार की योजना अंतर्गत हर-घर नल का जल योजना में चयनित होने के बावजूद भी इस गांव के लोग एक-एक बूंद पानी के लिए तरह रहे है। करीब तीन-चार माह तक कई गांव के ग्रामीण पानी के लिए परेशान होते रहते हैं। जिससे लोगों को पानी पीने के लिए भारी कठिनाई का सामना करना पड़ता है। वहीं नहाने के लिए तो सोचना पड़ता है। जबकि कई गावों में पानी के लिए पाइपलाइन डाल चुकी है तो कई गांव में पाइप लाइन डाली जा रही है। मगर पानी की समस्या जस की तस बनी हुई है। जलस्रोतों के सूखने से हर हिस्से में भूगर्भ जलस्तर नीचे चला गया है । ज्यादातर कुएं, तालाब और तो पहले ही जवाब दे चुके हैं। कहीं-कहीं डीप बोरिंग भी सूख गए हैं।