देवेन्द्र तिवारी सांची रायसेन
विश्व प्रसिद्ध बौद्ध धरोहर सांची में 8 अगस्त को जी-20 देशों के प्रतिनिधियों के संभावित आगमन को लेकर नगर को दुल्हन की तरह सजाने का कार्य युद्धस्तर पर जारी है। पर्यटन एवं प्रशासनिक अमला नगर के प्रमुख मार्गों और पर्यटन स्थलों को आकर्षक स्वरूप देने में जुटा हुआ है।
जानकारी के अनुसार स्तूप रोड से स्टेशन रोड तक फुटपाथों का सौंदर्यीकरण, टाइल्स बिछाने, रंग-रोगन, पुताई और सफाई का कार्य तेजी से चल रहा है। पर्यटन विकास विभाग द्वारा जम्बूद्वीप पार्क को भी नया स्वरूप देने के लिए दिन-रात कार्य कराया जा रहा है। सड़कों की मरम्मत, स्ट्रीट लाइटों को चालू करने और पूरे मार्ग को आकर्षक बनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
तैयारियों के चलते स्टेशन रोड के फल-फ्रूट विक्रेताओं को सर्विस रोड पर स्थानांतरित किया गया है, वहीं स्तूप रोड से हाथठेला व्यवसायियों को भी हटाया गया है ताकि अतिथियों के आवागमन में किसी प्रकार की बाधा न हो।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जिन फुटपाथों और सजावटी लाइटों पर पहले लाखों रुपये खर्च किए गए थे, वे लंबे समय से उपेक्षा के कारण खराब पड़े थे। अब विदेशी प्रतिनिधियों के आगमन को देखते हुए एक बार फिर व्यापक स्तर पर सौंदर्यीकरण किया जा रहा है, जिस पर करोड़ों रुपये खर्च होने की संभावना जताई जा रही है।
हालांकि नागरिकों का यह भी कहना है कि नगर के केवल वीआईपी मार्गों पर ही विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जबकि सांची के भीतरी क्षेत्रों में आज भी मूलभूत सुविधाओं और साफ-सफाई की स्थिति संतोषजनक नहीं है। लोगों का आरोप है कि हर बार किसी बड़े आयोजन या विदेशी अतिथि के आगमन पर ही व्यवस्थाएं दुरुस्त की जाती हैं, लेकिन उनके जाने के बाद फिर से उपेक्षा शुरू हो जाती है।
सांची लगभग ढाई हजार वर्ष पुरानी विश्व धरोहर है, जो अपने बौद्ध स्तूपों, प्राचीन शिल्पकला और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। यहां स्थित पुरातत्व संग्रहालय और बौद्ध स्मारक देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों और बौद्ध श्रद्धालुओं के प्रमुख आकर्षण हैं। प्रतिवर्ष हजारों विदेशी पर्यटक एवं बौद्ध धर्मावलंबी यहां दर्शन और अध्ययन के लिए पहुंचते हैं।
अब सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि जी-20 प्रतिनिधियों के दौरे के बाद भी सांची की व्यवस्थाएं इसी प्रकार बनी रहती हैं या फिर यह तैयारियां केवल वीआईपी दौरे तक ही सीमित रह जाती हैं।