रिपोर्ट धीरज जॉनसन दमोह
शहर से लगभग 30 किमी दूर ग्राम बलारपुर गांव के कुछ हिस्सों के सड़क मार्ग पर पानी भरा हुआ दिखाई देता है जिससे लोगों को निकलने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है, मार्ग के किनारे नाली न होने के कारण गंदा पानी फैल जाता है जिससे पैदल चलना भी मुश्किल है संक्रमण और बीमारी भी संभव है, परंतु इसका समाधान दिखाई नहीं देता। लगातार स्वच्छता अभियान जारी रहने के बाद भी इस तरह की गंदगी दर्शाती है कि गांव में अभी भी जागरूकता और दृढ़ इच्छा शक्ति की जरूरत है। जिससे स्वच्छता अभियान सफल होगा।

बलारपुर गांव में प्रवेश करते ही एक मेडिकल स्टोर और उसके बाजू में प्रैक्टिशनर बैठा हुआ दिखाई देता है, आश्चर्य यह कि यहां कोई रजिस्ट्रेशन नंबर या बोर्ड नहीं लगा है जिससे अन्य जानकारियां प्राप्त हो सके। प्रैक्टिशनर के कक्ष में दो साधारण पलंग, एक पर्दा, एक गैस सिलेंडर और टेबिल, स्टूल दिखाई देते है पर चिकित्सीय सावधानियां परिलक्षित नहीं होती है पर प्रैक्टिशनर की प्रैक्टिस चल रही है जहां अस्वस्थ लोग इलाज के इंतजार में बैठे हुए दिखाई देते है,और स्वास्थ्य विभाग बेखबर है।

बलारपुर गांव में तालाब के किनारे कुछ कलाकृतियां, प्रतिमाएं रखी हुई है जिन्हें देखकर प्रतीत होता है कि ये काफी प्राचीन होंगी, ग्रामीण यहां पूजा अर्चना करने पहुंचते है परंतु देखरेख के अभाव में इनकी क्षति होना संभव है, जिसका संरक्षण किया जा सकता है।

इस संबंध में रानी दमयंती पुरातत्व संग्रहालय के मार्गदर्शक डॉ सुरेंद्र चौरसिया का कहना था कि प्रथम दृष्टया और संभवत: विष्णु प्रतिमा लगभग 10 वीं 11वीं शताब्दी और मंदिर के अवशेष, शिवलिंग, सिंह प्रतिमा आदि पुरावशेष है,ग्रामीणों की भावनाओं का हम सम्मान करते है पर ग्रामीण उतने बेहतर तरीके से इनका संरक्षण नहीं कर सकता जितना कि कार्यरत विभाग कर सकता है।