–भजन न करने वाला सबसे बड़ा भाग्यहीन: बटुक जी
विदिशा से अदनान खान की रिपोर्ट।
ग्राम खामखेड़ा (लश्करपुर) में आज से सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा का शुभारंभ हुआ। जिसके लिए गांवभर में धूमधाम से कलश यात्रा निकाली गई। यात्रा के पहले कथा व्यास पंडित अंकितकृष्ण तेनगुरिया ने कथास्थल के पास स्थित हनुमान मंदिर पर पूजा अर्चना की। इसके बाद माताएं-बहनें और श्रद्धालु बड़ी संख्या में कलश यात्रा में शामिल हुए। यात्रा गांव के मुख्य मार्गों से होती हुई कथास्थल पहुंची । भक्तों ने जमकर भजनों पर नृत्य किया और वहीं सैकड़ों भक्त ठाकुर जी की भक्ति में रंगे नजर आए। और कथास्थल पर व्यासगादी की पूजा अर्चना के बाद बटुकजी महाराज ने कथा का वाचन किया। कथास्थल पर मौजूद श्रद्धालुओं को संबोधित करते पंडित अंकितकृष्ण ने श्रद्धालुओं को भागवत कथा का महत्व बताया उन्होंने कहा कि तराजु के एक पलड़े पर समस्त साधन जैसे यज्ञ, दान, तप, जप, ध्यान आदि को रखा एवं दूसरे पलड़े पर श्रीमद्भागवत महापुराण को रखा तो तराजू के भागवत वाला पलड़ा सबसे भारी सिद्ध हुआ।

और इसे सुनने से मनुष्य के पापों का नाश होता है।श्रद्धालुओं से कहा कि ये हमारा सौभाग्य है कि हमें हनुमानजी के इस मंदिर प्रांगढ़ में सात दिनों तक कथा सुनने का अवसर मिला है। संसार में जो भगवान का भजन न कर सके, वह सबसे बड़ा भाग्यहीन है। भगवान इस धरती पर बार-बार इसलिए आते हैं ताकि हम उनकी कथाओं में आनंद ले सकें । पहलेकी अपेक्षा वर्तनान समय में कथाएं अधिक हो रही है, उन्होंने कहा कि कथाओं के माध्यम से अपना चित्त शुद्ध कर सकें। व्यक्ति इस संसार से केवल अपना कर्म लेकर जाता है। इसलिए अच्छे कर्म करो। भाग्य, भक्ति, वैराग्य और मुक्ति पाने के लिए भगवत की कथा सुनो औऱ मनुष्य जीवन के लिए परमात्मा का पूजा पाठ कर हमेशा आभार जताओ।