Let’s travel together.

नवरात्रि के प्रथम दिन मां के शैलपुत्री स्वरूप की उपासना

0 83

नवरात्रि के प्रथम दिन मां के शैलपुत्री स्वरूप की उपासना होती है. हिमालय की पुत्री होने के कारण इनको शैलपुत्री कहा जाता है. पूर्व जन्म में इनका नाम सती था और ये भगवान शिव की पत्नी थी. सती के पिता दक्ष प्रजापति ने भगवान शिव का अपमान कर दिया था, इसी कारण सती ने अपने आपको यज्ञ अग्नि में भस्म कर लिया था

शारदीय नवरात्रि के पहले दिन, भक्त ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करते हैं और साफ वस्त्र धारण करते हैं। इसके बाद, एक चौकी पर गंगाजल छिड़ककर उसे शुद्ध किया जाता है और फिर उस पर मां दुर्गा की मूर्ति, तस्वीर या फोटो स्थापित की जाती है। पूरे परिवार के साथ विधि-विधान से कलश स्थापना की जाती है।

नवरात्रि के पहले दिन घट स्थापना के साथ ही नवरात्रि शुरू हो जाती हैं। साथ ही विभिन्न पंडालों में मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित कर मां शक्ति की आराधना की जाती है। नवरात्रि पर मां दुर्गा के धरती पर आगमन का विशेष महत्व होता है। इस साल चैत्र नवरात्रि पर 30 साल के बाद सर्वार्थअमृत सिद्धि योग बनने जा रहा है, जो अत्यंत शुभकारी है। इस दौरान मां दुर्गा की आराधना करने से सभी कष्ट और दुखों से मुक्ति मिलती है।  सनातन धर्म में उदया तिथि मान्य है।  को घटस्थापना औरपूजा की सामग्री एकत्रित कर शारदीय नवरात्रि को स्नान करने के बाद लाल वस्त्र धारण करने चाहिए। इसके बाद एक चौकी पर गंगाजल छिड़क कर शुद्ध करके उस पर लाल कपड़ा बिछाएं और मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित करें और कलश की स्थापना करें। कलश की स्थापना करने के बाद मां दुर्गा को लाल वस्त्र, लाल फूल, लाल फूलों की माला और श्रृंगार आदि की वस्तुएं अर्पित करें और धूप व दीप जलाएं। यह सभी वस्तुएं अर्पित करने के बाद गोबर के उपले से अज्ञारी करें। जिसमें घी, लौंग, बताशे, कपूर आदि चीजों की आहूति दें। इसके बाद नवरात्रि की कथा पढ़ें और मां दुर्गा की धूप व दीप से आरती उतारें और उन्हें प्रसाद का भोग लगाएं।

मां शैलपुत्री सौभाग्य की देवी हैं। उनकी पूजा से सभी सुख प्राप्त होते हैं। पर्वतराज हिमालय के घर पुत्री रूप में उत्पन्न होने के कारण माता का नाम शैलपुत्री पड़ा। माता शैलपुत्री का जन्म शैल या पत्थर से हुआ, इसलिए इनकी पूजा से जीवन में स्थिरता आती है। मां को वृषारूढ़ा, उमा नाम से भी जाना जाता है। उपनिषदों में मां को हेमवती भी कहा गया है।
पूजा-विधि

इस दिन सुबह उठकर जल्दी स्नान कर लें, फिर पूजा के स्थान पर गंगाजल डालकर उसकी शुद्धि कर लें।घर के मंदिर में दीप प्रज्वलित करें।मां दुर्गा का गंगा जल से अभिषेक करें।

नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना भी की जाती है।पूजा घर में कलश स्थापना के स्थान पर दीपक जलाएं। मां दुर्गा को अर्घ्य दें।मां को अक्षत, सिन्दूर और लाल पुष्प अर्पित करें, प्रसाद के रूप में फल और मिठाई चढ़ाएं।धूप और दीपक जलाकर दुर्गा चालीसा का पाठ करें और फिर मां की आरती करें।

मां को भोग भी लगाएं। इस बात का ध्यान रखें कि भगवान को सिर्फ सात्विक चीजों का भोग लगाया जाता है। इस दिन मां को सफेद वस्त्र या सफेद फूल अर्पित करें। मां को सफेद बर्फी का भोग लगाएं।

मंत्र

वन्दे वांछितलाभाय, चंद्रार्धकृतशेखराम।

वृषारूढ़ां शूलधरां, शैलपुत्रीं यशस्विनीम।

Leave A Reply

Your email address will not be published.

विश्व स्तनपान सप्ताह : सांची में धात्री माताओं को स्तनपान के महत्व की दी गई जानकारी     |     बारिश पूर्व जल भराव न हो इसकी हुई तैयारी लेकिन बारिश ने ही खोल दी दावों की पोल     |     किशोर कुमार के अमर गीतों से सजी संगीतमयी शाम, युवा गायक उत्सव पारे की प्रस्तुति ने जीता दिल     |     संदीपा पारे के स्वागत गीत से हुआ 56वें गुरु वंदना महोत्सव का शुभारंभ     |     आस्था बनाम विकास! हनुमान मंदिर बचाने सड़क पर उतरे साधु-संत और ग्रामीण     |     3 – 4 महीने से पेंशन बंद, बैंक के चक्कर काटने को मजबूर बेसहारा बुजुर्ग     |     हाईवे-18 पर मौत के गड्ढे, बालमपुर घाटी से त्रिमूर्ति चौराहा तक 150 से ज्यादा गहरे गड्ढे, टोल वसूली जारी, हादसे बदस्तूर जारी     |     हाईवे-18 पर आवारा मवेशियों का जमाबड़ा, हर पल मंडरा रहा हादसों का खतरा     |     स्‍मृतिशेष:: हिन्‍दी-जीवनव्रती पद्मश्री कैलाशचन्‍द्र पंत- विजयदत्‍त श्रीधर     |      “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान के तहत किया पौधारोपण, पर्यावरण संरक्षण का लिया संकल्प     |    

Don`t copy text!
पत्रकार बंधु भारत के किसी भी क्षेत्र से जुड़ने के लिए इस नम्बर पर सम्पर्क करें- 9425036811