रामभरोस विश्वकर्मा, मंडीदीप रायसेन
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव द्वारा झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ सख्त कार्यवाही के आदेश जारी किए थे।पर रायसेन कलेक्टर और मुख्य चिकित्सा अधिकारी को दिए थे। रायसेन जिले में ताबड़ तोड़ कार्यवाही होती दिखाई नजर आ रही है।रायसेन जिले के अन्य ब्लॉक में स्वास्थ्य विभाग बड़ी कार्यवाही कर रहा है।जिससे झोला छाप डाक्टरों में हड़कंप मचा हुआ है।स्वास्थ्य विभाग की टीम को देखकर डाक्टर दुकानें बंद भी कर रहे है।पर जिस प्रकार की कार्रवाई औबेदुल्लागंज ब्लॉक में देखी जा रही है।इससे प्रतीत होता है ओबेदुल्लागंज ब्लॉक में झोला छाप डाक्टरों को ओबेदुल्लागंज स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने खुली छूट दे रखी है।

कहीं ना कहीं मुख्यमंत्री के आदेशों को पलीता लगाया जा रहा है।वही इक्का दुक्का कार्रवाई कर खानापूर्ति की जा रही है। वहीं बड़े स्तर पर आज भी झोलाछाप डॉक्टर खुलेआम क्लीनिक खोल रहे हैं।कहीं ना कहीं स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की मिलीभगत के कारण ही यह संभव हो सका है। कहीं ना कहीं डॉक्टरों की स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत के कारण ही झोलाछाप डॉक्टरों के क्लीनिक खुले आम संचालित हो रहे हैं। वहीं इससे प्रतीत होता है।कि मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव का आदेश औबेदुल्लागंज ब्लॉक में निष्क्रिय दिखाई नजर आते है। औबेदुल्लागंज ब्लॉक में लगभग 100 से 150 के बीच झोला छाप डॉक्टर बैठे हैं। इसके बाद भी कार्रवाई चंद डॉक्टर पर की जाती है। जिससे अधिकारियों की भूमिका संदेह के घेरे में दिखाई नजर आती है।वही मुख्यमंत्री मोहन यादव के द्वारा 15/07/2024 को आदेश जारी हुआ था।आदेश के 20 दिन बाद भी कार्यवाही ठंडे बस्ते में दिखाई नजर आ रही है।

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को डाक्टर पहुंचाते है आर्थिक लाभ, इसलिए नही होती कार्यवाही
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव का आदेश औबेदुल्लागंज ब्लॉक के अंतर्गत क्यों फेल होता दिखाई नजर आता है।जब हमने इसकी पड़ताल की तो सामने आया की झोला छाप डाक्टरों द्वारा मोटी रकम इकट्ठा करके ओबेदुल्लागंज ब्लॉक के अधिकारियों द्वारा 2 किस्तो में दी जाती है। मोटी रकम पहुचाई जाती है।जिसके कारण स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने खोला छाप डाक्टरों को मुख्यमंत्री के आदेश के बाद भी क्लीनिक खोलने की खुली छूट दे रखी है।वही उद्योग हकीकत समाचार पत्र के पास आर्थिक लाभ पहुंचाने को लेकर सारे साक्ष्य मौजूद है।जिससे खुलेआम डाक्टर द्वारा स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की भूमिका पर सवाल खड़े कर रहे है।इसलिए ही झोला छाप डाक्टरों को कार्यवाही का कोई डर नहीं है।