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गांवों में जगाई योग की अलख,सांची विश्वविद्यालय द्वारा गांवों में योग शिविर आयोजित

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– योग से सुधरते हैं लोक और परलोक , ढकना-चपना और सलामतपुर में योग फेरी

रायसेन।  सांची बौद्ध-भारतीय ज्ञान अध्ययन विश्वविद्यालय ने गांव-गांव जाकर योग की अलख जगाने का बीड़ा उठाया है। इस साल योग दिवस के अवसर पर विश्वविद्यालय के शिक्षकों-छात्रों की टीम ने गांव के सम्मानित लोगों के साथ मिलकर इन गांवों के घर-घर पहुंचकर योग के प्रति जागरूकता जगाई। टीम के सदस्यों ने गांव को लोगों को सलामतपुर के राजपूत सामूहिक भवन में आमंत्रित किया और योग व आसनों की ट्रेनिंग दी

16 से 20 जून 2024 तक आयोजित किए गए इस पांच दिवसीय योग शिविर में सांची विश्वविद्यालय के योग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. उपेंद्र बाबू खत्री ने कहा कि योग के अभ्यास से लोक और परलोक दोनों सुधारे जा सकते हैं। प्रथम सत्र में उन्होंने ग्रामीणों को योग विषय से अवगत करवाया जिसमें योग के महत्व, आवश्यकता, पारंपरिक योग इत्यादि के बारे में बताया गया। डॉ. खत्री ने कहा कि योग भारतीय संस्कृति की अनुपम विधा हैं और यह जीवन को आनंदित करने का मार्ग है। योग द्वारा व्यक्तित्व का निर्माण होता है। योग द्वारा शारीरिक, मानसिक भावनात्मक एवं आध्यात्मिक स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है। शरीर, मन एवं श्वास के साथ किए गए अभ्यास का नाम योगाभ्यास होता है। उन्होंने पारंपरिक एवं योग साहित्य पर आधारित योगाभ्यास भी करवाया।


दूसरे सत्र में सांची विश्वविद्यालय की टीम ने ग्रामीणों को उपनिषदों एवं योग ग्रंथों पर आधारित ध्यान से अवगत कराया। इसके पश्चात सूर्य नमस्कार, शरीर संवर्धात्मक आसन एवं वात, पित्त एवं कफ रोग निवारण हेतु क्रियाओं यथा जलनेति, सूत्र नेति, कुंजल, दंड धौति, वस्त्र धौति का प्रायोगिक ज्ञान दिया गया।
तीसरे सत्र में एकाग्रता बढ़ाने वाले आसनों का अभ्यास करवाया गया साथ ही तंत्र पर आधारित प्रयोग पद्धति योग निद्रा का अभ्यास करवाया गया ।


चौथे सत्र में सजगता एवं चेतना के जागरण संबंधित योगाभ्यास करवाए गए। प्राणों के आयाम हेतु योग साहित्य आधारित प्राणायाम का अभ्यास करवाया गया।
पांचवें और अंतिम सत्र में अथर्ववेदिय मांडूक्य उपनिषद पर आधारित ध्यान का अभ्यास करवाया गया। इसमें बताया गया कि कैसे ध्यान के माध्यम से व्यक्ति जीवन में आने वाली चुनौतियों का सहर्ष समाधान खोज सकता है और कैसे ध्यान द्वारा व्यक्ति स्वयं से परिचित होता है। प्रत्येक सत्र के अंत में भक्ति योग के माध्यम से नवीन ऊर्जा का संचार किया गया, जिससे मानसिक एवं भावनात्मक स्तर पर लाभ होता है। कार्यक्रम का समापन वृक्षारोपण के साथ किया गया। कार्यक्रम में बच्चों, नव युवको एवं बुजुर्ग व्यक्तियों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।
कार्यक्रम मुख्य अतिथि के रूप में श्री मेहरबान सिंह राजपूत उपस्थित रहे तथा योग की जागरूकता व प्रचार-प्रसार के लिए सलामतपुर के श्री लक्ष्मीनारायण राजपूत ने अपना सहयोग प्रदान किया।

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