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नवरात्रि का चौथा दिन :: सौभाग्य योग में करें मां कूष्मांडा की पूजा

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आज 12 अप्रैल दिन शुक्रवार को चैत्र नवरात्रि का चौथा दिन है. चैत्र नवरात्रि के चौथे दिन मां दुर्गा के चौथे स्वरूप मां कूष्मांडा की पूजा करते हैं. हर साल चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मां कूष्मांडा की उपासना का विधान है. इस बार मां कूष्मांडा की पूजा सौभाग्य योग में होगी।

8 भुजाओं वाली मां कूष्मांडा शेर पर सवार होती हैं. वे अपने भुजाओं में कमल पुष्प, धनुष, बाण, गदा, चक्र, माला, अमृत कलश आदि धारण करती हैं. वे इस पूरे ब्रह्मांड की रचना करने वाली देवी हैं. उन्होंने अत्याचार और अधर्म को खत्म करने के लिए यह अवतार लिया. वे चौथी नवदुर्गा हैं. उनके अंदर निर्माण की शक्ति समाहित होती है.

नवरात्रि में चौथे दिन देवी को कुष्मांडा के रूप में पूजा जाता है। अपनी मंद, हल्की हंसी के द्वारा अण्ड यानी ब्रह्मांड को उत्पन्न करने के कारण इस देवी को कुष्मांडा नाम से अभिहित किया गया है। जब सृष्टि नहीं थी, चारों तरफ अंधकार ही अंधकार था, तब इसी देवी ने अपने ईषत्‌ हास्य से ब्रह्मांड की रचना की थी। इसीलिए इसे सृष्टि की आदिस्वरूपा या आदिशक्ति कहा गया है।

इस देवी की आठ भुजाएं हैं, इसलिए अष्टभुजा कहलाईं। इनके सात हाथों में क्रमशः कमण्डल, धनुष, बाण, कमल-पुष्प, अमृतपूर्ण कलश, चक्र तथा गदा हैं। आठवें हाथ में सभी सिद्धियों और निधियों को देने वाली जप माला है। इस देवी का वाहन सिंह है और इन्हें कुम्हड़े की बलि प्रिय है। संस्कृति में कुम्हड़े को कुष्मांड कहते हैं इसलिए इस देवी को कुष्मांडा। इस देवी का वास सूर्यमंडल के भीतर लोक में है। सूर्यलोक में रहने की शक्ति क्षमता केवल इन्हीं में है। इसीलिए इनके शरीर की कांति और प्रभा सूर्य की भांति ही दैदीप्यमान है। इनके ही तेज से दसों दिशाएं आलोकित हैं। ब्रह्मांड की सभी वस्तुओं और प्राणियों में इन्हीं का तेज व्याप्त है।

मां कूष्मांडा की पूजा से आपके दुखों का अंत होगा और जीवन में आने वाले संकट मिट जाते हैं. मां कूष्मांडा की आराधना करने से व्यक्ति के यश और कीर्ति में बढ़ोत्तरी होती है. उम्र भी बढ़ती है.

पूजा के मंत्र
1. ओम देवी कूष्माण्डायै नमः

2. ऐं ह्री देव्यै नम:

मां कूष्मांडा को पूजा के समय मालपुए का भोग लगाना चाहिए. उनको मालपुआ बहुत प्रिय हे। चौथे दिन प्रात:काल में स्नान आदि से निवृत होकर साफ कपड़े पहन लें. उसके बाद मां कूष्मांडा की पूजा करें. सबसे पहले मां कूष्मांडा का जल से अभिषेक करें. उनको अक्षत्, सिंदूर, फल, गुड़हल या गुलाब का फूल, लाल रंग की चुनरी या साड़ी, श्रृंगार सामग्री, धूप, दीप आदि अर्पित करें. उस दौरान पूजा मंत्र का उच्चारण करें. उनको मालपुए का भोग लगाएं. सबसे अंत में मां कूष्मांडा की आरती करें.

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