चैत्र नवरात्रि का आज दूसरा दिन है, जो मां ब्रह्मचारिणी को समर्पित है. देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा करने से लक्ष्य प्राप्ति में आ रही बाधाएं दूर होती है. इस दिन देवी को पंचामृत का भोग लगाएं, इससे वह जल्दी प्रसन्न होती है. चंद्रमा जनित दोष दूर होते हैं. मानसिक तनाव से मुक्ति मिलती है. आज द्वितीया तिथि है, इस तिथि के स्वामी ब्रह्ममा जी है. इस दिन किसी ब्रह्मचारी ब्राह्मण की पूजा करना, उन्हें भोजन, अन्न वस्त्र का दान देना श्रेयस्कर होता है.जिन लोगों के करियर में अड़चने आ रही है, शिक्षा प्राप्ति में तमाम परेशानियां झेल रहे हैं तो वह गणपति जी को बेसन के लड्डू का भोग लगाएं. कहते हैं इससे बिगड़े काम बन जाते हैं. आज देवी माता को सफेद रंग का कमल या फिर चमेली के फूलों की माला अर्पित करें और या देवी सर्वभूतेषु माँ ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम: इस मंत्र का 108 बार जाप करें. इससे सौभाग्य में वृद्धि होती है
मां ब्रह्मचारिणी ने हिमालय के घर पुत्री रूप में जन्म लिया था और नारद जी के उपदेश का पालन किया जिसके अनुसार भगवान शंकर को पति रूप में प्राप्त करने के लिए मां माता ने घोर तपस्या की थी. इस कठिन तपस्या के कारण इन्हें ब्रह्मचारिणी नाम से जाना गया. एक हजार वर्ष तक मां ब्रह्मचारिणी ने सिर्फ फल-फूल खाकर तपस्या की और सौ वर्षों तक केवल जमीन पर रहकर शाक पर निर्वाह किया. कुछ दिनों तक कठिन व्रत रखे और खुले आकाश के नीचे वर्षा और धूप के घोर कष्ट सहती रही. कई वर्षों तक टूटे हुए बिल्व पत्र खाएं और भगवान शंकर की आराधना करती रहीं. इसके बाद तो मां ब्रह्मचारिणी ने सूखे बिल्व पत्र खाने भी छोड़ दिए. वर्षों तक निर्जल और निराहार रह कर तपस्या करती रहीं.