सुरेन्द्र जैन धरसीवा
बढ़ती महंगाई घटती कमाई के बीच पढ़े लिखे बेरोजगारों की संख्या इतनी तेजी से बढ़ती जा रही है कि मेकेनिकल इंजियरिंग के डिग्रीधारी भी अब हताश होकर ओधोगिक क्षेत्रों में सड़क किनारे खड़े होकर मजदूरी का काम तलाश रहे हैं ।आसपास के ग्रामीण अंचलों ओर प्रदेश के दूरस्थ अंचलों से ओधोगिक क्षेत्र में काम की तलाश में भटकने वाले सैंकड़ों गरीब और शिक्षित बेरोजगार बीरगांव में सड़क किनारे आडवाणी स्कूल से लेकर बुधवारी बाजार के बीच रोज सुबह से ही खड़े हो जाते हैं कभी किसी को काम मिलता है कभी नहीं मिलता सड़क किनारे काम की तलाश में खडे लोगो से बात की तो उनमे कुछ ऐंसे भी शिक्षित बेरोजगार निकले जो मेकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई किये लेकिन आज परिवार को दो वक्त की रोटी के लिए मजदूरी की तलाश कर रहे.सड़क किनारे सिंर्फ़ पुरुष वर्ग ही नहीं बल्कि बड़ी संख्या में गरीब महिलाऐं भी काम की तलाश में खड़ी रहती हैं.दिशाहीन राजनीति जब जनता के लिए काम की जगह सिंर्फ़ राम के नाम से लाभ उठाने तक सीमित हो जाये और श्रीराम की मर्यादाओं को भुलाकर जनहित में सोचना बंद कर दे तो भगवान ही मालिक होता है देश की जनता का।