हेमेन्द्र नाथ तिवारी
उज्जैन। विश्व शांति और अहिंसा के अद्वितीय उन्नायक महात्मा गांधी की जयंती के अवसर पर रविवार 2 अक्टूबर को पूर्वाह्न में विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन के महाराजा जीवाजीराव सिंधिया पुस्तकालय परिसर स्थित महात्मा गांधी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। कार्यक्रम में उच्च शिक्षा मंत्री डॉ मोहन यादव ने कहा कि महात्मा गांधी अपार प्रेरणा के केंद्र हैं। उनके जीवन, व्यवहार और कार्यों को नई पीढ़ी आत्मसात करने के लिए आगे आए। किसी भी प्रकार का नशा सामाजिक अभिशाप है, जिससे पारिवारिक और राष्ट्रीय जीवन के समक्ष संकट आते हैं।
व्याख्यान देते हुए प्रख्यात पर्यावरणविद् पद्मश्री डॉ जनक पलटा ने कहा कि महात्मा गांधी ने प्राकृतिक ऊर्जा को सर्वाधिक महत्व दिया है। वे शरीर, मस्तिष्क और आत्मा के बीच संतुलन स्थापित करने की प्रेरणा देते हैं। वर्तमान विश्व में पर्यावरणीय संतुलन को स्थापित करने के लिए गांधी जी के विचारों को साकार करने की आवश्यकता है। जिस प्रकार का हम भोजन करते हैं वैसा ही मन बनता है। इसलिए हम रसायनों से मुक्त जैविक खेती से उत्पन्न पदार्थों का सेवन करें। बापू ने कहा था कि हिंसा न करो, लेकिन वर्तमान में सोशल मीडिया पर कई रूपों में हिंसा चल रही है। इससे मुक्त करने के लिए सभी को प्रयास करने होंगे। हमारे द्वारा लिए गए संकल्पों को ईश्वर देख रहा है, इसलिए उन्हें जीवन में उतारने की आवश्यकता है। गांधी जी ने कहा था कि प्रकृति के लिए समय निकालना है, जो हमें जीवन में सादगी का पाठ सिखाती है।
अध्यक्षीय उद्बोधन में कुलपति प्रो.अखिलेश कुमार पांडेय ने कहा कि महात्मा गांधी ने पर्यावरण अनुकूल व्यवहार के लिए महत्वपूर्ण संदेश दिए हैं। विक्रम विश्वविद्यालय निरंतर पौधों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए जन सहयोग से कार्य कर रहा है। गांधीजी ने नशा मुक्ति के लिए लोगों को जागरूक किया। आज शराब एवं अन्य नशों के साथ सभी प्रकार के व्यसनों से मुक्ति के लिए जन जागरूकता लाने की आवश्यकता है। कुलसचिव डॉ प्रशांत पुराणिक ने कहा कि वर्तमान में स्वच्छ भारत और नशा मुक्ति अभियान में युवा पीढ़ी की सहभागिता आवश्यक है।
विषय प्रवर्तन करते हुए गांधी अध्ययन केंद्र के निदेशक एवं कुलानुशासक प्रो.शैलेंद्र कुमार शर्मा ने कहा कि महात्मा गांधी ने व्यसन मुक्ति, स्वाबलंबन, स्वदेशी, धारणीय विकास, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक समरसता, सद्भाव और सत्याग्रह के सूत्रों को जन-जन तक पहुंचाया। उनके द्वारा रोपित मूल्य सार्वभौमिक हैं।
स्वागत भाषण डीएसडब्ल्यू डॉ सत्येंद्र किशोर मिश्रा ने दिया। इस अवसर पर वरिष्ठ पर्यावरण सेवी चिकित्सक डॉ विमल गर्ग एवं कलाकार शैलेंद्र भट्ट का सम्मान कुलपति प्रो.पांडेय द्वारा किया गया।
अतिथि स्वागत कुलसचिव डॉ प्रशांत पुराणिक, गांधी अध्ययन केंद्र के निदेशक प्रो शैलेंद्रकुमार शर्मा, अधिष्ठाता, विद्यार्थी कल्याण डॉ सत्येंद्र किशोर मिश्रा, डीसीडीसी प्रो देवेंद्र मोहन कुमावत, पुस्तकालयाध्यक्ष डॉ संदीप तिवारी, डॉ ज्योति उपाध्याय, डॉ कनिया मेड़ा,आदि ने किया। आयोजन में प्रो अचला शर्मा, प्रो के एन सिंह, डॉ राज बोरिया, डॉ सोनल सिंह, डॉ धर्मेंद्र मेहता, डॉ रमण सोलंकी आदि सहित प्रबुद्ध जनों, शिक्षकों और विद्यार्थियों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। कार्यक्रम का संचालन डॉ जगदीश चंद्र शर्मा ने किया एवं आभार प्रदर्शन पुस्तकाध्यक्ष डॉ संदीप तिवारी ने किया।