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35 साल से सड़क का इंतजार, बारिश में गांव का संपर्क मुश्किल

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डोहलन ढाना के ग्रामीणों की मांग—लगभग 3 किमी पक्की सड़क बने, आपात स्थिति में नहीं हो परेशानी

बैतूल। जिले की प्रभातपट्टन तहसील के ग्राम डोहलन ढाना के ग्रामीण पिछले करीब 35 वर्षों से पक्की सड़क की मांग कर रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार वर्ष 1991 में चंदोरा डैम टूटने के बाद यहां आकर बसे परिवारों को आज तक गांव से मुख्य पक्की सड़क तक जोड़ने वाली करीब 3 किलोमीटर सड़क की सुविधा नहीं मिल पाई है। ग्रामीणों का कहना है कि खराब और कच्चे रास्ते के कारण सामान्य दिनों में भी आवागमन परेशानी भरा है, जबकि बारिश के मौसम में स्थिति और गंभीर हो जाती है।

बारिश में आवागमन सबसे बड़ी चुनौती

ग्रामीणों के मुताबिक डोहलन ढाना से निकटतम पक्की सड़क तक पहुंचने में करीब 40 मिनट तक का समय लग जाता है। बारिश के दौरान कच्चा रास्ता कीचड़ और फिसलन से भर जाता है, जिससे दोपहिया और चारपहिया वाहनों का आवागमन मुश्किल हो जाता है। ग्रामीणों का दावा है कि इस दौरान एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड और मालवाहक वाहनों का गांव तक पहुंचना भी बेहद कठिन हो जाता है।

आपात स्थिति में बढ़ जाती है परेशानी

ग्रामीणों ने बताया कि सड़क की खराब स्थिति का सबसे गंभीर असर स्वास्थ्य संबंधी आपात स्थितियों में पड़ता है। अचानक बीमारी, हार्ट अटैक, ब्रेन हेमरेज या सर्पदंश जैसी परिस्थितियों में मरीज को मुलताई अस्पताल ले जाने में अतिरिक्त समय लग जाता है। ग्रामीणों का दावा है कि पूर्व में इलाज में देरी के चलते जान जाने की घटनाएं भी हुई हैं। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

किसानों के सामने भी परिवहन की समस्या

सड़क की स्थिति का असर गांव की कृषि व्यवस्था पर भी पड़ रहा है। ग्रामीणों के अनुसार व्यापारी और मालवाहक वाहन गांव तक आने से बचते हैं या खराब रास्ते में फंस जाते हैं। इससे किसानों को अपनी उपज बाजार तक पहुंचाने में अतिरिक्त परेशानी और खर्च उठाना पड़ता है।

ग्रामीणों का दावा है कि इस वर्ष धनिया की फसल में परिवहन और बिक्री से जुड़ी समस्याओं के चलते करीब 30 से 40 लाख रुपये तक का अनुमानित नुकसान हुआ है। वहीं गोभी सहित अन्य हरी सब्जियों की बिक्री में भी परेशानी आ रही है। ग्रामीणों के मुताबिक गन्ने का उठाव समय पर नहीं होने से वजन में कमी आती है, जिसका असर किसानों को मिलने वाले भुगतान पर पड़ता है।

विद्यार्थियों को भी करना पड़ता है परेशानी का सामना

ग्रामीणों के अनुसार सड़क की खराब स्थिति का असर विद्यार्थियों पर भी पड़ रहा है। स्कूल और अन्य शैक्षणिक संस्थानों तक आने-जाने में बच्चों को परेशानी होती है। बारिश के दिनों में यह समस्या और बढ़ जाती है।

 

कई बार दिए आवेदन, फिर भी समाधान का इंतजार

ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण को लेकर क्षेत्रीय विधायक, ग्राम पंचायत के सरपंच एवं सचिव सहित संबंधित विभाग और अन्य जनप्रतिनिधियों को कई बार आवेदन दिए जा चुके हैं। ग्रामीणों के अनुसार लगातार मांग और शिकायतों के बावजूद अभी तक करीब 3 किलोमीटर पक्की सड़क का निर्माण नहीं हो सका है।

ग्रामीणों ने प्रशासन और सरकार से मांग की है कि डोहलन गांव से डोहलन ढाना तक लगभग 3 किलोमीटर पक्की सड़क का निर्माण कराया जाए, ताकि बारिश के मौसम में आवागमन सुचारु हो सके और आपात स्थिति में मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाया जा सके।

ग्रामीणों का कहना है कि सड़क उनके लिए केवल आवागमन का साधन नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि और रोजगार से जुड़ी मूलभूत आवश्यकता है। अब ग्रामीणों को उम्मीद है कि उनकी वर्षों पुरानी मांग पर प्रशासन गंभीरता से कार्रवाई करेगा।

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