Let’s travel together.

नवा रायपुर की महत्वाकांक्षी परियोजना के टेंडर पर गंभीर सवाल

0 28

प्रतीकात्मक चित्र

सुरेन्द्र जैन धरसीवां रायपुर 

छत्तीसगढ़ की सबसे महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं में शामिल नवा रायपुर की PPP आधारित टाउनशिप परियोजना अब एक बड़े विवाद के घेरे में आती दिखाई दे रही है।

जिस परियोजना को नवा रायपुर के विकास और पुराने रायपुर से उसकी कनेक्टिविटी के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, उसी परियोजना में M/s Nalanda Engicon Pvt. Ltd., Patna की technical eligibility और उसके द्वारा प्रस्तुत credentials को लेकर गंभीर लिखित आपत्तियां उठाई गई हैं।

और अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब Work Order रोकने और credentials की स्वतंत्र जाँच कराने की मांग पहले ही शासन और संबंधित प्राधिकरण के सामने रखी जा चुकी है, तो उन आपत्तियों का अंतिम और पारदर्शी निराकरण किए बिना Nalanda Engicon के पक्ष में Work Order जारी करने की प्रक्रिया क्यों आगे बढ़ाई जा रही है?

शिकायत में एक-दो नहीं, बल्कि कई गंभीर बिंदु उठाए गए हैं।सबसे चर्चित मामला U.P. State Bridge Corporation के Sikkim Project से जुड़े ₹150.88 करोड़ के Quantity/Work Completion Certificate का है।

2 जून 2025 के इस Certificate में Nalanda Engicon से संबंधित कार्य के लिए साफ शब्दों में “The work is completed” लिखा गया है।लेकिन शिकायतकर्ता का आरोप है कि संबंधित मूल NHIDCL परियोजना की प्रगति के रिकॉर्ड इस दावे पर सवाल खड़े करते हैं।

तो सवाल सीधा है—जिस काम को Completion Certificate में पूरा बताया गया, क्या वह वास्तव में उस तारीख को 100 प्रतिशत पूरा था यदि हाँ, तो Final Completion Certificate कहाँ है?Final Measurement और Final Bill कहाँ हैं?वास्तविक  completion date क्या है?और ₹150.88 करोड़ में कितना काम वास्तव में execute हुआ तथा कितना payment हुआ?

लेकिन मामला यहीं समाप्त नहीं होता।यह मूल परियोजना NHIDCL, भारत सरकार की थी। शिकायत में सवाल उठाया गया है कि Nalanda Engicon को यह काम Sub-contract में देने से पहले क्या Employer यानी NHIDCL की आवश्यक Approval/NOC ली गई थी?

यदि अनुमति ली गई थी तो उसकी certified copy सामने रखी जानी चाहिए।और यदि ऐसी अनुमति नहीं थी, तो फिर इसी काम के Certificate को नवा रायपुर के ₹100 करोड़ से अधिक के qualifying similar-work credential के रूप में स्वीकार कैसे किया गया?

शिकायत में Nalanda Engicon के एक अन्य Sikkim NH-717B Package-II C credential पर भी आपत्ति है। आरोप है कि bidder के दस्तावेजों में जिसकी completion date 28 सितंबर 2026 बताई गई है, उसी ongoing work से लगभग ₹162 करोड़ का eligibility credit लिया गया।

ऐसे में सवाल उठता है—यदि tender condition completed single road project की मांग करती है, तो ongoing project को completed qualifying experience मानने का आधार क्या है?

इतना ही नहीं Odisha के दो अलग-अलग contracts को लेकर भी आपत्ति दर्ज की गई है। आरोप है कि अलग Agreement Numbers और अलग Completion Certificates वाले LOT-1 और LOT-2 को जोड़कर लगभग ₹480.72 करोड़ का एक बड़ा qualifying project दिखाया गया।यदि दोनों वास्तव में अलग contracts हैं, तो क्या tender की “single qualifying work” की शर्त के तहत उन्हें जोड़ना स्वीकार्य था?एक और गंभीर सवाल bidder के past-performance को लेकर है।

शिकायत में दावा किया गया है कि Nalanda Engicon-Ujjain Engicon JV के संबंध में NHIDCL का वर्ष 2024 का Non-Performer record भी रहा है। यदि ऐसा है, तो संबंधित आदेश, उसके विरुद्ध न्यायालयीन कार्यवाही और bidder के declaration—तीनों की स्वतंत्र legal scrutiny क्यों नहीं की गई?अब मामला केवल एक contractor के certificate तक सीमित नहीं है।शिकायत में e-tender प्रक्रिया की IT forensic जाँच तक की मांग की गई है।आरोप है कि प्रथम कॉल में online bid submission की अंतिम समय-सीमा 21 मई 2026, दोपहर 3 बजे थी, लेकिन इसके बाद भी portal पर अतिरिक्त समय मिलने और बाद में bid parameter/rate भरे जाने की आशंका जताई गई है।

यदि यह आरोप गलत है तो सरकार के लिए स्थिति स्पष्ट करना बेहद आसान है

3 बजे से 5 बजे तक के server logs सार्वजनिक जाँच के लिए सुरक्षित किए जाएँ।Bidder-wise login time, last edit, rate entry, freeze time, final submission time, Admin ID, IP logs और Corrigendum publication timestamp की independent IT forensic audit करा दी जाए।दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।

यह मामला इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि नवा रायपुर की यह योजना सामान्य सरकारी निर्माण नहीं है। इसे छत्तीसगढ़ में बड़े स्तर पर Public-Private Partnership के माध्यम से विकसित होने वाली महत्वाकांक्षी township योजना के रूप में देखा जा रहा है।

योजना की परिकल्पना पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के समय हुई और लंबे इंतजार के बाद जब परियोजना धरातल पर उतरने की स्थिति में पहुँची है, तब contractor selection और technical credentials पर इतने गंभीर सवाल उठना चिंता का विषय है।

हाल के समय में छत्तीसगढ़ के एक अन्य बड़े सरकारी ठेके में Dilip Buildcon से जुड़े credentials को लेकर भी आरोप और विवाद सामने आने का दावा शिकायतकर्ता कर रहा है। लेकिन उन आरोपों की स्वतंत्र सत्यता अलग से स्थापित की जानी आवश्यक है।इसी पृष्ठभूमि में नवा रायपुर का मामला और संवेदनशील हो जाता है।

सवाल सरकार से है—

क्य छत्तीसगढ़ में योग्य और अनुभवी contractors की कमी है?यदि Nalanda Engicon के सभी credentials पूरी तरह सही हैं तो सरकार और संबंधित प्राधिकरण को उन्हें issuing authorities से verify कराकर सार्वजनिक रूप से स्थिति स्पष्ट करने में आपत्ति क्यों होनी चाहिए?

और यदि credentials पर गंभीर documentary objections लंबित हैं, तो verification पूरी होने और speaking order पारित होने से पहले Work Order जारी करने की इतनी जल्दबाजी क्यों?

संबंधित विभाग का राजनीतिक नेतृत्व प्रशासनिक अनुभव रखने वाले पूर्व IAS अधिकारी के पास होने के कारण पारदर्शिता की अपेक्षा और अधिक बढ़ जाती है। ऐसे में यह आवश्यक है कि आरोपों की निष्पक्ष जाँच हो और बिना प्रमाण किसी मंत्री अथवा अधिकारी को दोषी ठहराने के बजाय दस्तावेज स्वयं सच सामने लाएँ।

अब चार सवालों के जवाब पूरे छत्तीसगढ़ को मिलने चाहिए

क्या ₹150.88 करोड़ का Sikkim work वास्तव में पूरा था?क्या Nalanda Engicon के नाम विधिवत Work Order/Agreement था?क्या NHIDCL ने Sub-contracting की लिखित Approval/NOC दी थी?और क्या नवा रायपुर टेंडर में Nalanda Engicon की eligibility प्रत्येक RFP condition के अनुसार स्वतंत्र रूप से verify की गई थी?यदि जवाब हाँ है—तो प्रमाणित दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएँ।यदि जवाब नहीं है—तो Work Order रोका जाए, independent inquiry कराई जाए और eligibility का पुनर्मूल्यांकन किया जाए।क्योंकि सवाल किसी एक कंपनी या राजनीतिक दल का नहीं है।सवाल नवा रायपुर के भविष्य का है।सवाल छत्तीसगढ़ के सार्वजनिक धन का है।

और सवाल यह है कि प्रदेश की इतनी महत्वपूर्ण परियोजना का फैसला सत्यापित दस्तावेजों पर होगा—या सवालों से घिरे credentials पर?

इस मामले में U.P. State Bridge Corporation, NHIDCL, NRANVP और छत्तीसगढ़ शासन के आधिकारिक जवाब का इंतजार रहेगा। संबंधित कंपनी का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से सामने रखा जाना चाहिए।

Leave A Reply

Your email address will not be published.

नवा रायपुर की महत्वाकांक्षी परियोजना के टेंडर पर गंभीर सवाल     |     बाड़ी में समर्थन मूल्य पर मूंग खरीदी शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न, किसानों को मिली सुविधा     |     बुधनी से औबेदुल्लागंज होते हुए भोजपुर पहुंची कावड़ यात्रा, भोजपुर धाम में किया जलाभिषेक     |     ग्राम पंचायत गढ़ी में आयोजित शांति समिति की बैठक में बनी सहमति     |     शांति, सद्भाव और उत्साह से मनाए जाएं सभी त्योहार,शांति समिति की बैठक में निर्णय     |     रक्षाबंधन विद इंडियन आर्मी: लायंस क्लब समृद्धि ने भेजीं 1000 राखियां     |     पहचान छिपाकर युवती से दोस्ती का आरोप, दुष्कर्म और धर्म परिवर्तन के दबाव के मामले में आरोपी गिरफ्तार     |     केंद्रीय मंत्री  शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में जिला विकास समन्वय एवं निगरानी(दिशा समिति )की  बैठक आयोजित     |     आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित साँची उपडाकघर का वर्चुअल किया गया लोकार्पण     |     सावन के अंतिम को गूंजा हर-हर महादेव, 160 कांवड़ियों ने शिवाजी पर चढ़ाया नर्मदा जल     |    

Don`t copy text!
पत्रकार बंधु भारत के किसी भी क्षेत्र से जुड़ने के लिए इस नम्बर पर सम्पर्क करें- 9425036811