अष्टानिका महापर्व के प्रथम दिन भाग्योदय तीर्थ में हुआ भव्य आयोजन
सागर। अष्टानिका महापर्व के पावन अवसर पर भाग्योदय तीर्थ में सिद्धचक्र महामंडल विधान का शुभारंभ धार्मिक एवं आध्यात्मिक वातावरण में हुआ। इस अवसर पर मुनि श्री उद्यम सागर महाराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि तीनों लोकों और तीनों कालों में यदि कोई सर्वश्रेष्ठ पर्व है, तो वह अष्टानिका महापर्व है। इस पावन पर्व में की गई आराधना, साधना और विधान का पुण्य अनंत फल प्रदान करने वाला होता है।
मुनि श्री ने कहा कि व्रतों में दशलक्षण पर्व का विशेष महत्व है। जिस प्रकार कर्मों के राजा चक्रवर्ती, इंद्रों के राजा सौधर्म इंद्र माने जाते हैं, उसी प्रकार विधानों में श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान को विधानों का राजा कहा गया है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि अष्टानिका महापर्व के दौरान विधान को कभी नहीं छोड़ना चाहिए। पूर्ण विशुद्धि, श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ किया गया यह अनुष्ठान साधक के जीवन में अद्भुत आध्यात्मिक फल प्रदान करता है।
मुनि श्री उद्यम सागर महाराज ने कहा कि सिद्धचक्र महामंडल विधान के माध्यम से वातावरण में शांति और साधकों के परिणामों में निर्मलता का भाव उत्पन्न होना चाहिए। यदि इस चातुर्मास में सभी के अंत:करण में शांति, संयम और आत्मकल्याण की भावना जागृत हो जाए, तो यह चातुर्मास निश्चित रूप से सार्थक और शांति का संदेश देने वाला सिद्ध होगा।
उन्होंने कहा कि अष्टानिका पर्व आत्मशुद्धि, संयम और त्याग का पर्व है। त्याग के लिए किसी पर कोई बंधन नहीं है, लेकिन जिसकी भावना हो, वह अपनी सामर्थ्य और श्रद्धा के अनुसार नियम ले सकता है। इस पावन पर्व में बाहरी खान-पान का त्याग कर सात्विकता, संयम और धर्ममय जीवन को अपनाने का प्रयास करना चाहिए।
अष्टानिका महापर्व के प्रथम दिन प्रातः 7 बजे भाग्योदय तीर्थ परिसर में भव्य घटयात्रा निकाली गई। इसके पश्चात मंडल शुद्धि एवं ध्वजारोहण का धार्मिक कार्यक्रम संपन्न हुआ। ध्वजारोहण का सौभाग्य राजेंद्र जैन केसली परिवार को प्राप्त हुआ। सिद्धचक्र महामंडल विधान का निर्देशन विजय भैया, लखनादौन द्वारा किया जा रहा है।
मुकेश जैन ढाना ने बताया कि 22 जुलाई को 8 अर्घ्य समर्पित कर सिद्ध परमेष्ठी की आराधना की जाएगी, जबकि विधान के अंतिम दिन 1024 अर्घ्य समर्पित किए जाएंगे। इस दौरान श्रद्धालु भक्तिभाव से सिद्धों की आराधना कर आत्मकल्याण की भावना से धर्मलाभ लेंगे।
विधान में प्रमुख पात्रों में श्रीपाल– मैना सुंदरी प्रदीप जैन, ज्योति जैन पड़ा, सौधर्म इंद्र राजेंद्र जैन, विकास केसली, चक्रवर्ती अजित नीटू एवं नेहा आनंद स्टील, कुबेर इंद्र संदीप विनोद बैसाखिया बिलहरा, महायज्ञ नायक सीमा संजय पायल, बाहुबली इंद्र आकांक्षा नितिन दलपतपुर, ईशान इंद्र अभिषेक अशोक जैन, माहेंद्र इंद्र मीना सन्मति चश्मा तथा सानत इंद्र सुमत जैन मसुरयाई सहित अनेक श्रद्धालु विभिन्न धार्मिक पात्रों में शामिल होकर विधान में सहभागी बन रहे हैं।
अष्टानिका महापर्व के अवसर पर भाग्योदय तीर्थ में प्रतिदिन धर्म, भक्ति, आराधना और आध्यात्मिक साधना का वातावरण बना हुआ है। श्रद्धालु बड़ी संख्या में विधान में सम्मिलित होकर पुण्यार्जन कर रहे हैं।