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प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना: रायसेन में सीएससी प्रशिक्षण की वास्तविकता और केंद्रों का घटता आधार

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रायसेन। एक ओर जहां किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग जिला रायसेन प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के तहत किसानों को बीमा कराने के लिए प्रेरित कर रहा है, वहीं दूसरी ओर इस प्रक्रिया की रीढ़ माने जाने वाले कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) की जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है।

आधिकारिक विज्ञप्ति में दावा किया गया कि जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक मर्यादित रायसेन और बीमा कंपनी प्रतिनिधियों ने CSC/PACS संचालकों को PMFBY के तहत ऋणी और गैर-ऋणी किसानों के नामांकन के लिए प्रशिक्षित किया, लेकिन इस प्रशिक्षण शिविर की सच्चाई निराशाजनक निकली।

सूत्रों के अनुसार, जिला स्तरीय इस महत्वपूर्ण बैठक में मात्र 10-15 VLE (ग्राम स्तरीय उद्यमी) ही उपस्थित हुए, जो रायसेन जिले में सक्रिय CSC संचालकों की कुल संख्या का एक छोटा सा हिस्सा है। यह उपस्थिति दर्शाती है कि CSC योजना को 10 साल पूरे होने के बावजूद जमीनी स्तर पर इसकी प्रभावशीलता और संचालकों का जुड़ाव कमजोर होता जा रहा है।
गलतियों का सिलसिला और बेलगाम ‘मीटिंग्स’
बैठकों में कम उपस्थिति के बावजूद, जो संचालक प्रशिक्षण में शामिल होते भी हैं, वे अक्सर फसल बीमा नामांकन प्रक्रिया में गलतियां करते हैं, जिससे किसानों को अनावश्यक परेशानी होती है। यह स्थिति इस बात पर सवाल उठाती है कि क्या इन तथाकथित ‘प्रशिक्षणों’ का कोई वास्तविक लाभ हो रहा है या ये केवल खानापूर्ति हैं।
ऐसा प्रतीत होता है कि CSC रायसेन में “बेलगाम मीटिंग्स के नाम पर सीएससी बस नाम कर रही है”। इन बैठकों का उद्देश्य स्पष्ट नहीं है और ये जमीनी स्तर पर समस्याओं को हल करने के बजाय केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित हैं।
CSC रायसेन: भ्रष्टाचार, कमीशन का अभाव और केंद्रों का बंद होना – क्या है वजह?
एक गोपनीय रिपोर्ट के अनुसार, रायसेन जिले में 50% CSC केंद्र बंद हो चुके हैं। यह चौंकाने वाला आंकड़ा CSC योजना की विफलता की ओर इशारा करता है। इस गिरावट की मुख्य वजहों में से एक CSC में हो रहा कथित भ्रष्टाचार और समय पर केंद्र संचालकों को कमीशन न मिलना बताया जा रहा है।
संचालकों का कहना है कि उन्हें प्रदान की गई सेवाओं के लिए समय पर भुगतान नहीं मिलता, जिससे उनके लिए केंद्र चलाना आर्थिक रूप से अव्यवहारिक हो जाता है। इसके अतिरिक्त, कई संचालकों ने प्रक्रियाओं में पारदर्शिता की कमी और भ्रष्टाचार के मामलों की शिकायत की है, जो उनके मनोबल को तोड़ रहा है और उन्हें केंद्रों को बंद करने पर मजबूर कर रहा है।
जब तक इन गंभीर मुद्दों को संबोधित नहीं किया जाता, तब तक प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना जैसी महत्वपूर्ण सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में CSC की भूमिका संदिग्ध बनी रहेगी और ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल सेवाओं का विस्तार एक चुनौती बना रहेगा।

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