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सांची विकास खंड मुख्यालय सरकारी अधिकारी कर्मचारी आशियाना विहीन

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देवेन्द्र तिवारी सांची, रायसेन

वैसे तो इस नगर को विकास खंड मुख्यालय के रूप में जाना जाता है इस नगर में अनेक सरकारी दफ्तर होने से सैकड़ों अधिकारी कर्मचारी शासकीय योजनाओं के क्रियान्वयन का जिम्मा संभाल रहे है परन्तु इन अधिकारी कर्मचारियों के सामने अपने आशियाने ही नहीं है जिससे यहां तैनात अधिकारी कर्मचारियों को खासी परेशानी उठानी पड़ती है इन पर न तो सरकार न ही प्रशासन की ही नजर पहुंच पा रही हैं।

जानकारी के अनुसार इस ऐतिहासिक स्थल को सरकार ने विकास खंड का दर्जा तो दे दिया तथा इस स्थल पर अनेक विकास खंड स्तरीय सरकारी कार्यालय भी अपने कार्य को अंजाम दे रहे है परन्तु यहां अधिकांश सरकारी अधिकारियों कर्मचारियों के सामने अपने सरकारी आशियाने की दरकार वर्षो से लगी हुई हैं इस ओर न तो सरकार न ही प्रशासन का ध्यान पहुंच पा रहा है जिससे आधिकारी कर्मचारियों को या तो मंहगे दामों पर किराए के भवनों में गुजारा करना पड रहा है अथवा अपडाउन से अपनी सेवाएं देने मजबूर होना पडता हैं एक ओर सरकारें आम बेघर लोगों की सुध लेते हुए पीएम आवास योजना अथवा सीएम आवास योजना अंतर्गत भवन उपलब्ध करा रही हैं तो दूसरी ओर सरकार के ही अपने अधिकारी कर्मचारियों को सरकारी भवनों से मेहरूम रहना पड रहा है बताया जाता है यहां स्थित जनपद पंचायत जो 83 पंचायतों मे सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन करती हैं इस मे लगभग दस अधिकारी कर्मचारी जुटे हुए हैं इसमे केवल अधिकारी का ही आवास हैं शेष कर्मचारी या तो अपने स्वयं के भवन अथवा मनमाने किराए के भवन तथा अपडाउन की समस्या से पीड़ित हैं जबकि संविदा कर्मियों की संख्या भी इस कार्यालय में कम नहीं है जबकि इस जनपद पंचायत की स्वयं की सरकारी भूमि भूमाफियाओं के कब्जे में भेंट चढ़ चुकी है इसी प्रकार नगर परिषद प्रशासन जिसके पास स्वयं का सीएमओ आवास एवं विश्राम गृह हुआ करता था वह भी बेचा जा चुका है इस कार्यालय में लगभग 23 स्थाई अधिकारी कर्मचारी नगर वासियों को सुविधाएं उपलब्ध करा रहे है परन्तु स्वयं सीएमओ को किराए के भवन में गुजारा करने मजबूर होना पड रहा है तथा अन्य कर्मचारी या तो किराए अथवा अपडाउन की समस्या की मार झेलने मजबूर हो चुके है हालांकि यहां भी संविदा एवं दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों की संख्या खासी बताई जाती हैं बावजूद इसके अपने ही कर्मचारियों को सरकार स्वयं के भवन उपलब्ध कराने में नाकाम साबित हो चुकी हैं यही हालत यहां विद्धुत वितरण कंपनी का जिसमे लगभग अधिकारी सहित 6 कर्मचारी चौबीस घंटे नगर को रोशनी देने की कवायद में जुटे हुए हैं जबकि संविदा सहित दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी भी रातदिन अपनी जान जोखिम में डाल कर नगर को रोशन करने की कवायद में जुटे हैं परन्तु इनके सामने भी अपने स्वयं के आशियाने न होने की समस्या बढ गई है इसी प्रकार नगर को सुरक्षा एवं शांति पूर्ण समाज को सुरक्षित रखने के लिए पुलिस विभाग के लगभग 25 अधिकारी एवं पुलिस कर्मी चौबीसों घंटे अपनी सेवाएं प्रदान कर रहे है उन्हें भी किराए के भवन अथवा वर्षों पुराने निर्मित खंडहर भवनों मे रहकर नगर की सुरक्षा कमान संभालने मजबूर होना पड रहा है यही हाल महिला बाल विकास विभाग कार्यालय का भी बना हुआ है जिसके पास स्वयं का कार्यालय भवन तक किराए के भवन में संचालित किया जा रहा है यहां भी लगभग 15 अधिकारी कर्मचारी अपनी सेवा प्रदान कर रहे है यहां रिक्त पदों को भरने की सुध भी प्रशासन नहीं ले पा रहा है तब अधिकारी कर्मचारियों के सामने अपडाउन करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है इनमे सबसे महत्वपूर्ण स्वास्थ्य विभाग के हालात जिसमें लगभग 59 अधिकारी कर्मचारी तैनात रहकर लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करा रहे है परन्तु यहां सरकार ने सिविल अस्पताल की सौगात तो दे दी परन्तु यहां तैनात न तो डाक्टरों न ही कर्मचारियों को रहने की सुध आ सकी तब यहां कुछ कर्मचारी किराए के मकान में अपनी सेवा दे रहे है तो कुछ को अपडाउन करने पर मजबूर होना पडता है तब औचक निरीक्षण में अधिकारियों द्वारा पडताल तो की जाती हैं परन्तु इनके आवास की ओर किसी अधिकारी का ध्यान नहीं पहुचने पर भी सवाल खड़े होते है इस क्रम में जब शिक्षा विभाग आता है तो सरकार द्वारा करोडो की लागत से स्कूल भवन का निर्माण तो करा दिया गया परन्तु इस स्कूल में शिक्षा प्रदान करने वाले अधिकारियों शिक्षकों को भी अपने सरकारी भवनों की दरकार बनी हुई है जबकि इस सांदीपनि विद्यालय में लगभग प्राचार्य सहित 37 शिक्षक नौनिहाल युवा युवतियों को शिक्षित करने का बीडा उठाए हुए है परन्तु यहां भी न तो भवन हैं न ही कोई व्यवस्था जिससे शिक्षकों को भी मजबूर होकर अपडाउन करना पड़ता हैं यही हालत कन्या उच्तर मा वि का भी बना हुआ है ।इस विकास खंड स्तरीय स्थल पर जितने अधिकारी कर्मचारी शासन की विभिन्न योजनाओं को धरातल तक पहुंचाने की कवायद में जुटे हुए हैं इनकी संख्या अनुसार इस नगर में भवन की कमी लगातार बनी हुई है आखिर सरकारी सेवा देने वाले अधिकारी कर्मचारियों के सामने अपने सरकारी आवास की दरकार बनीं हुई है इस ओर न तो सरकार न ही प्रशासन की नजर पहुंच पा रही हैं जिससे अधिकारी कर्मचारियों को अपने सरकारी आवास की जरुरत मेहसूस की जा रही हैं ।

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