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42 करोड़ की लागत से बन रहा सीएम राइज स्कूल, गुणवत्ता पर उठ रहे है सवाल

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रेत की जगह गिट्टी की दष्ट से हो रहा है निर्माण
तराई नहीं होने से जगह-जगह से उखाड़ रही हैं बीम

बहुमंजिला इमारत की ओर विभागीय अधिकारी नही दे रहे ध्यान

शरद शर्मा बेगमगंज रायसेन

बच्चों को शासकीय स्कूलों में बेहतर शिक्षा दिलाने के लिए नगर में लगभग 42 करोड़ की लागत से सीएम राइज स्कूल भवन का निर्माण कार्य किया जा रहा है, स्कूल भवन निर्माण में गुणवत्ताहीन घटिया सामग्री का उपयोग हो रहा है। ठेकेदार द्वारा निर्माण कार्य में जमकर धान की जा रही है सीएम राइज के आधुनिक एवं तीन अलग अलग बहुमंजिला भवन बनाये जा रहे है। भवन निर्माण मैं मिट्टी मिक्स रेत एवं स्टोन डस्ट का खुलेआम निर्माण किया जा रहा है। वही निर्माण कार्य में लगे मजदूर भी सेफ्टी किट का उपयोग नहीं कर रहे हैं। साथ मैं पिलंत लेवल पर भी मुरम कोपरा की जगह मिट्टी मिक्स मुरम का उपयोग किया गया है,भवन निर्माण मैं पानी से प्रॉपर तराई नही की जा रही है। जिससे पिलर बीम अलग ही सफेद कलर के दिखाई दे रहे है,फ्लोरिंग लेवर पर लोहे के सरिया की रॉड को स्टोन क्रेशर की डस्त के साथ भरी जा रही है। वही इस भवन मैं उपयोग की जा रही ईंट को क़्वालिटी भी सही है है, अब सवाल उठता है कि इस बहुमंजिला इमारत की गुणवत्ता के लिए विभाग का कोई जिम्मेदार अधिकारी मौके नही रहते है जबकि एक प्राइवेट एजेंसी को इसकी देखरेख का जिम्मा सौपा गया है।

बिना सुरक्षा उपकरण के सीएम राइज स्कूल बिल्डिंग में कार्य कर रहे हैं मजदूर

सीएम राइज स्कूल भवन निर्माण कार्य मैं नियमों का पालन नहीं हो रहा। मजदूर बिना सुरक्षा उपकरण के काम कर रहे हैं। मजदूर 25 फिट ऊँचाई पर चुनाई का कार्य कर रहे है,अगर गलती से किसी मजदूर के ऊपर ईंटे रॉड या अन्य भारी वस्तु गिर जाए तो दुर्घटना घट सकती है।
निर्माण में लगे कर्मी भी बिना सेफ्टी बेल्ट केप के काम में जुटे हैं। यह जानलेवा हो सकता है।
निर्माण कार्य में जुटे मजदूरों की सुरक्षा पर भी ध्यान नहीं दिया जा रहा है। करीब 25 से 30 फीट ऊंचाई पर मजदूर बिना सुरक्षा किट के ही कार्य करते नजर आ रहे हैं।

गुणवत्ता पर उठ रहे है सवाल

सीएम राइस स्कूल भवन मैं ठेकेदार द्वारा उपयोग ली जाने वाली रेत की जगह ठेकेदार गिट्टी की डस्ट का उपयोग कर रहा है। िजससे उसकी क्वालिटी पर संदेह खड़ा हो रहा है। गिट्टी, सीमेंट और डस्ट क्या डाल रहे हैं और क्या नहीं, इसका कोई दायरा ही तय नहीं है। खास बात यह है कि इस पूरे निर्माण की मॉनीटरिंग करने वाला तक यहां कोई विभागीय जिम्मेदार अधिकारी तक नजर नहीं आता।
जिस पर किसी का कोई जोर नहीं चल रहा। रेत की जगह डस्ट से न सिर्फ सीमेंट खराब हो रही बल्कि बैसमेंट को क्वालिटी भी नहीं मिल पा रही है।

इनका कहना है
भवन निर्माण मैं सभी तरह के नियमों का पालन किया जा रहा है,तराई भी प्रॉपर की जा रही है,भवन के फ्लोरिंग लेवल पर डस्ट का उपयोग कर सकते है,मजदूरों की सुरक्षा की किट रखी हुई है,लेकिन मजदूर पहनते नही है,अब आगे से सख्ती के साथ पालन किया जायेगा।

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