सुरेंद्र जैन धरसीवा
धरसीवां के ग्राम मलौद में इन दिनों ग्रामीण भक्ति रस में डूबे हैं यहां श्रीमद भागवत रामकथा का विशाल धार्मिक आयोजन चल रहा है जिसमे अंतराष्ट्रीय कथा वाचक पंडित युवराज पांडे द्वारा श्रीमदभागवत राम कथा की जा रही है

कथा में शामिल होने प्रतिदिन हजारों की सख्या में लोग पहुंच रहे हैं श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ने से पूरा मलोद ही धर्म नगरी में बदल गया है। धूप और उमस के बीच श्रद्धालुओं की अपार भीड़ पंडाल के बाहर भी नजर आ रही है। आचार्य पंडित युवराज पांडेय के द्वारा भागवत कथा की वाचन शैली हर कोई प्रभावित नजर आ रहा है और जब तक भागवत कथा चलता रहता है। कोई भी श्रध्दालु पंडाल से उठने का नाम नही लेते। आज श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ में आज बहुत ही मनोहक रूप में भगवान राम और सीता का जन्म पर प्रकाश डाला जिसे उपस्तिथ भक्त गण भाव विभोर हो गए।

भगवताचार्य पंडित युवराज पांडे ने अपने चिरपरिचित अंदाज में भगवान राम की कथा का वर्णन करते हुए बताया कि पृथ्वी पर जब-जब असुरों का आतंक बढ़ा है तब-तब ईश्वर ने किसी न किसी रूप में अवतार लेकर उनका संहार किया है। जबधरा पर धर्म के स्थान पर अधर्म बढ़ने लगता है तब धर्म की स्थापना के लिए ईश्वर को आना पड़ता है। भगवान राम ने भी पृथ्वी लोक पर आकर धर्म की स्थापना की, वही माता सीता की जन्म पृष्ठ भूमि को भी विस्तार से बताया जिसमे मुख्य रूप से बताया कि राजा जनक दरबार में ऋषियों से मंत्रणा करते हैं। अकाल दूर करने के लिए ऋषिगण राजा को सोने का हल चलाने का सुझाव देते हैं। राजा जनक रानी को साथ लेकर खेतों में सोने का हल चलाते हैं। इस दौरान खेतों में हल रुक जाता है। वहीं पर सीता का जन्म होता है।
भागवत कथा जरूर सुने आचार्य पंडित युवराज पांडेय ने कहा कि श्रीमद भागवत कथा सुनने से पापी भी पाप मुक्त हो जाते है, कथा अमृतपान करने से सम्पूर्ण पापो का नास होता है। उन्होंने कहा कि इस संसार में केवल भगवान ही हमारे है और कोई भी संसार में अपना नहीं है। इसलिए समस्त संसार से मोह को त्यागकर हमें भगवान के श्रीचरणो में अपने मन को लगाना चाहिए।