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केंद्र के महंगाई भत्ता की घोषणा के बाद मध्यप्रदेश के कर्मचारी संगठन हुए लामबंद

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केन्द्रीय तिथि से 8% मंहगाई भत्ता लागू करने की उठी मांग

भोपाल । केंद्र सरकार द्वारा जनवरी 2024 से 4% महंगाई भत्ता घोषित किए जाने के बाद मध्यप्रदेश में भी कर्मचारियों और पेंशनरों को देय तिथि से 8% महंगाई भत्ता और महंगाई राहत दिए जाने को मांग जोर पकड़ने लगी है,इसके लिए लोकसभा की आचार संहिता के पूर्व 8% महंगाई भत्ता लागू करवाने के लिए प्रदेश के संगठन लामबंद होना शुरू हो गए हैं|

*केंद्र की तुलना में राज्य शासन के कर्मचारी और पेंशनर्स हुए 8% पीछे*

समग्र शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष सुरेशचंद्र दुबे और प्रदेश संरक्षक मुरारीलाल सोनी का कहना है कि राज्य के कर्मचारी और पेंशनर्स केंद्र द्वारा जुलाई 2023 से चार प्रतिशत महंगाई भत्ता दिए जाने से पहले ही 4% महंगाई भत्ते से पीछे थे, केंद्र द्वारा जनवरी 2024 से 4% महंगाई भत्ते बढ़ाए जाने के बाद राज्य के कर्मचारी महंगाई भत्ते में अब 8% पीछे हो गए है। वरिष्ठ कर्मचारी नेता मुरारीलाल सोनी का यह भी कहना है छत्तीसगढ़ एवं मध्यप्रदेश में एक ही पार्टी की सरकार होने बावजूद प्रदेश के सेवानिवृत्त कर्मचारियों को धारा 49 के फेर में जबरन उलझाया जा रहा है जिसे सरकार को तत्काल समाप्त कर सेवानिवृत्त कर्मचारियों को केंद्र के समान महंगाई राहत प्रदान करना चाहिए।

संपूर्ण कर्मचारी जगत में बढ़ रही है जबरजस्त नाराजगी

समग्र शिक्षक संघ के प्रदेश महामंत्री संजय तिवारी का कहना है कि राज्य सरकार को केंद्र द्वारा घोषित देय तिथि से राज्य के कर्मचारियों और पेंशनर्स को 8% महंगाई भत्ता और राहत देने का तत्काल निर्णय लेना चाहिए. राज्य का समूचा कर्मचारी जगत वेतन विसंगति, OPS , प्रमोशन, लंबित स्वास्थ्य बीमा योजना,चतुर्थ क्रमोन्नत वेतनमान, अवकाश नगदीकरण जैसे मसलों को लेकर वैसे भी राज्य सरकार से नाराज चल रहा हैं, ऐसे में महंगाई भत्ते जैसे जायज हक को रोककर राज्य सरकार संपूर्ण कर्मचारी जगत की नाराजगी और बढ़ा रही है, जो हाल ही में होने वाले लोकसभा चुनाव की दृष्टि से उचित कदम नहीं माना जा सकता, उन्होंने कहा कि महंगाई भत्ते के मुद्दे को लेकर प्रदेश के सभी प्रमुख संगठन प्रतिनिधि जल्द ही मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव जी से भेंट करेंगे|

आदर्श आचार संहिता के पूर्व दिया जाए 8% मंहगाई का लाभ

मध्यप्रदेश राज्य कर्मचारी संघ के प्रदेश महामंत्री हेमंत श्रीवास्तव का कहना है कि पूर्व से लंबित 4% महंगाई भत्ता जुलाई माह से दिया जाना था किंतु विधानसभा निर्वाचन की आचार संहिता के कारण मध्यप्रदेश के कर्मचारियों का महंगाई भत्ता लंबित हुआ था किंतु 4 माह व्यतीत होने के उपरांत भी महंगाई भत्ते की घोषणा न होने से प्रदेश के कर्मचारी और पेंशनर्स में जबरदस्त नाराजगी बढ़ रही है जो चुनाव की दृष्टि सरकार के लिए ठीक नहीं है, राज्य में 13 मार्च के बाद कभी भी आदर्श आचार संहिता लागू हो सकती है ऐसे में राज्य के कर्मचारियों और पेंशनर्स को लोकसभा की आदर्श आचार संहिता के पूर्व 8% मंहगाई भत्ता/राहत देने हेतु राज्य सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए|

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