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सांची विश्वविद्यालय में छत्रपति शिवाजी जयंती पर व्याख्यान

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• डॉक्टर एस.सी. एल. चंद्रवंशी का आंखों की देखभाल पर विशिष्ट व्याख्यान

• बीमारियों और उन से बचाव के तरीके बताए
• देश को विखंडन से बचाया था शिवाजी ने

रायसेन। सांची बौद्ध-भारतीय ज्ञान अध्ययन विश्वविद्यालय में आज छत्रपति शिवाजी जयंती मनाई गई। इस अवसर पर विदिशा मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. एस.सी.एल चंद्रवंशी का एक विशिष्ट व्याख्यान भी आयोजित किया गया।


प्रो. चंद्रवंशी ने आंखों के सामान्य रोग: कारण और निवारण विषय पर केंद्रित व्याख्यान में आंखों की विभिन्न बीमारियों के बारे में बताया। डॉ. चंद्रवंशी ने बताया कि आज बच्चों से लेकर बड़ों तक स्क्रीन टाइम व रहन सहन के कारण आंखों की बीमारियां हो रही हैं। उन्होंने कहा कि लोगों में विटामिन डी की कमी के कारण आंखों पर चश्मा लग रहा है और दूसरा कारण फ्लैटों और कॉलोनियों में रहने के कारण आंखों का दूर तक न देख पाना बताया। डॉ चंद्रवंशी ने कहा कि सूरज की रोशनी और आंखों को बार-बार दूर तक देखने का आदी बनाकर चश्मे से काफी हद तक बचा जा सकता है।


प्रो. चंद्रवंशी ने कहा कि मोबाइल, कंप्यूटर, टीवी इत्यादि को लगातार बगैर पलके झपकाए और अत्यधिक देखने के कारण आंखों के सूख जाने के कारण भी बीमारियां हो रही हैं। प्रो. चंद्रवंशी ने लोगों के मन में आंखों व उनकी बीमारियों से जुड़े भ्रमों आदि के बारे में बड़े ही विस्तृत ढंग से बताया। छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों ने उनसे आंखों की विभिन्न बीमारियों के विषय में अपने-अपने सवाल किए।


प्रो. चंद्रवंशी ने डायबिटीज़ व ब्लड प्रेशर के कारण होने वाली रेटिनोपैथी, ग्लूकोमा, आंखो के फ्लू, अलर्जी के कारण होने वाली बीमारियां, पर्दे में धुंधलापन, मोतियाबिंद, दूर और पास के दृष्टि दोष, ए.आर.एम.डी, आंख आने के कारण, दृष्टि दोष के अनुवांशिक कारणों इत्यादि के बारे में बताया। डॉ. चंद्रवंशी ने बताया कि डायबिटीज़ अनियंत्रित होने के कारण सबसे पहला प्रभाव आंखों पर पड़ता है।


छत्रपति शिवाजी जयंती के अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. वैद्यनाथ लाभ ने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज ने औरंगज़ेब को चुनौती दी थी। उन्होंने पूरे देश को एक सूत्र में पिरो दिया। उन्होंने कहा कि देश के विखंडन की स्थिति आने से पहले ही उन्होंने बचा लिया। सहायक प्राध्यापक डॉ. प्रभाकर पांडे ने कहा कि शिवाजी गौरव पुरुष, राष्ट्र पुरुष थे और उन्होंने मराठा साम्राज्य का विस्तार अगर नहीं किया होता तो भारत विखंडित होता। उन्होंने बताया कि सन् 1646 में मात्र 16 साल की उम्र में शिवाजी महाराज ने तोरन के किले को जीत लिया था। कार्यक्रम में डीन डॉ नवीन मेहता ने अतिथि परिचय दिया।

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