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महाराष्ट्र के स्पीकर राहुल नार्वेकर ने शिव सेना विधायकों की अयोग्यता के मामले में मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को दी बड़ी राहत

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महाराष्ट्र के स्पीकर राहुल नार्वेकर ने शिव सेना विधायकों की अयोग्यता के मामले में मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को बड़ी राहत दी। नार्वेकर ने शिवसेना के संविधान और तमाम दूसरे पहलुओं का उल्लेख करने के बाद अपने फैसले का ऐलान किया। शिवसेना के 16 विधायकों की अयोग्यता के मामले में फैसला लेने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने नार्वेकर को 10 जनवरी की डेडलाइन दी थी। राहुल नार्वेकर ने अपने फैसले में कहा कि मैंने अयोग्यता के मामले में निर्णय लेते वक्त चुनाव आयोग के फैसले को ध्यान में रखा। नार्वेकर ने कहा कि मैं चुनाव आयोग के फैसले से बाहर नहीं जा सकता था। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग के रिकॉर्ड में शिंदे गुट ही असली शिवसेना है। नार्वेकर ने कहा कि शिवसेना का 2018 का संविधान मान्य नहीं है, क्योंकि इसके बाद शिवसेना में कोई चुनाव नहीं हुआ।

विधानसभा स्पीकर के फैसले से एकनाथ शिंदे को बड़ी राहत

इन बिंदुओं पर लिया फैसला
पार्टी का संविधान क्या कहता है?

नेतृत्व किसके पास था?

विधानमंडल में बहुमत किसके पास था?

महाराष्ट्र विधानसभा के स्पीकर राहुल नार्वेकर ने कहा कि चुनाव आयोग के रिकॉर्ड में एकनाथ शिंदे गुट असली शिवसेना है।
नार्वेकर ने कहा कि शिवसेना का 1999 का संविधान ही मान्य है। उन्होंने कहा कि संविधान में हुआ संशोधन रिकॉर्ड में नहीं है। नार्वेकर ने आगे कहा कि मैंने चुनाव आयोग के रिकॉर्ड को ध्यान में रखकर फैसला लिया। उन्होंने कहा कि 21 जून, 2022 को हुआ उसे समझना होगा।
नार्वेकर ने कहा कि शिवसेना में फैसले लेने के लिए सबसे बड़ी संस्था राष्ट्रीय कार्यकारिणी है।

फैसले की बड़ी बातें:
1. महाराष्ट्र राज्य विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि पार्टी के 2018 के संशोधित संविधान के अनुसार शिवसेना के नेतृत्व ढांचे पर भरोसा नहीं किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि 2013 और 2019 में नेतृत्व चुनने के लिए शिवसेना में कोई चुनाव नहीं हुआ। इसका कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं।

2. शिवसेना (यूबीटी) को पहला बड़ा झटका। महाराष्ट्र राज्य विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने शिवसेना के संशोधित संविधान को मानने से इनकार कर दिया, लेकिन पुराने और असंशोधित संविधान के आधार पर ही आदेश देने का फैसला किया।

3. महाराष्ट्र राज्य विधानसभा ने कहा कि ईसीआई ने पार्टी के रूप में प्रस्तुत और स्वीकार किए गए संविधान पर विचार किया जाएगा, न कि हाल ही में 2018 में किए गए संशोधित संविधान पर। उन्होंने फैसला देते समय संशोधित संविधान पर विचार करने की शिवसेना (यूबीटी) की मांग को खारिज कर दिया।

4. महाराष्ट्र राज्य विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने अपने आदेश में कहा कि दोनों पक्षों को सुनने के बाद, यह स्पष्ट है कि संविधान और अन्य मुद्दों पर दोनों पक्षों के बीच कोई सहमति नहीं है। निर्विवाद संविधान माना जाएगा न कि 2018 में किया गया संशोधित संविधान। यह संविधाना 1999 का है।

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