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तालाबों का कैचमेंट एरिया बढ़ाने और इनके चारों तरफ वृक्षारोपण करने से भी हो सकता है बेहतर जल संरक्षण: मेघ तिवारी,असिस्टेंट इंजीनियर

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रिपोर्ट धीरज जॉनसन,दमोह

विश्व में पानी की कमी को देखते हुए इसे बचाने के लिए विभिन्न स्तर पर अनेकोनेक प्रयास जारी है जिसके अच्छे परिणाम भी सामने आते रहे है।

स्थानीय स्तर पर भी जिले के अलग अलग स्थानों पर पानी को रोकने के विभिन्न माध्यम दिखाई देते है और वर्तमान में जल संरचनाओं का निर्माण कार्य भी किया गया है जिससे लोगों को पर्याप्त मात्रा में इसकी उपलब्धता हो सके और किसान भी लाभान्वित हों।

शहर और इसके निकट भी काफी संख्या में तालाब विद्यमान है और इनमें पानी भी है, जरूरत है सिर्फ इसे बेहतर रूप देने की, जिससे आने वाली पीढ़ी को मुश्किलों का सामना न करना पड़े। शहर के समीप कुछ दूरियों पर ऐसे ही तीन तालाब है अगर इन्हें किसी माध्यम से जोड़ दिया जाए और इनके चारों तरफ वृक्षारोपण कर दिया जाए तो इनके आस पास की सरकारी जमीन बची रहेगी,पानी प्रदूषित होने से बचेगा और जल स्तर भी बढ़ सकता है।

जमुनिया – बरपटी – राजनगर तालाबों को जोड़ा जा सकता है
इस संबंध में शहर के वरिष्ठ इंजीनियर और वर्तमान में नगर पालिका में असिस्टेंड इंजीनियर के रूप में सेवा दे रहे मेघ तिवारी ने बताया कि लगभग 2015 में जब जल संसाधन विभाग के प्रमुख अभियंता एम जी चौबे सर दमोह आए थे तो उनके द्वारा यह बताया गया था कि राजनगर तालाब का केचमेंट एरिया कम है इसलिए कई बार स्थिति ऐसी बनती है कि वह पूरा न भर पाए, ऐसी परिस्थिति में केचमेंट एरिया बढ़ाने के लिए उनके द्वारा मुझे बताया गया कि अगर जमुनिया -बरपटी – राजनगर तालाबों को जोड़ दिया जाए जिससे जब जमुनिया में भराव हो तो वह बरपटी में पहुंचे और जब बरपटी में पानी ओवर हो जाए तो वह राजनगर तालाब में आ सकता है। टोपोग्राफी के हिसाब से जमुनिया से राजनगर की तरफ ढाल है।उक्त सिलसिले में उनके द्वारा सुझाव उस समय के कार्यपालन यंत्री जो जल संसाधन विभाग दमोह से थे,उनको दिए गए थे।


तालाबों के आस पास खेतों में कीटनाशक छिड़काव से बचें और चारों तरफ करें पौधारोपण
उन्होंने आगे बताया कि जिस तरह से वर्तमान में हम देख रहे है कि पानी चारों तरफ एक सा नहीं गिरता है ऐसी परिस्थिति में केचमेंट एरिया बढ़ेगा तो तालाब जल्दी भर सकता है, साथ ही तालाबों के चारों तरफ अगर वृक्षारोपण/ पौधारोपण लगातार जारी रहे तो आस पास की सरकारी जमीन अवैध कब्जे से सुरक्षित रहेगी और बारिश के समय खेतों से बह कर कीटनाशक मिला हुआ पानी भी तालाब तक नहीं पहुंचेगा और पेड़ों के कारण गर्मी के मौसम में पानी का वाष्पीकरण कम होगा। कई बार इस तरह के प्रयास राजनगर तालाब के इर्द गिर्द किए, पौधे लगाएं जो अब बड़े हो चुके है, पर अभी भी कुछ हिस्से शेष है जहां हम सामूहिक प्रयास से सफल हो सकते है।

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