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जांच में अधिक डामर मिला लैब रिपोर्ट से पहले इंजीनियरों ने कह दिया- रोड अच्छी है

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 बालाघाट। केंद्र सरकार की ‘कायाकल्प’ योजना के तहत शहर में हुए डामरीकरण का निरीक्षण करने शुक्रवार को वरिष्ठ इंजीनियरों की टीम बालाघाट पहुंचीं। जांच दल में छत्तीसगढ़ शासन से सेवानिवृत्त इंजीनियर और अर्बन स्टेट क्वालिटी मानिटर प्रकाश साहू और नगरीय प्रशासन व विकास जबलपुर संभाग के असिस्टेंट इंजीनियर विजय सिंह बघेल थे, जिन्होंने कालीपुतली चौक से पुराना राम मंदिर तक 900 मीटर में हुए डामरीकरण की जांच की। जांच में जांच टीम को निर्माण मटेरियल में डेढ़ गुना (बिटुमिन कंटेंट 5.5 की तुलना में 8.1 प्रतिशत मिला) डामर मिला। इंजीनियरों का कहना है कि डामर सड़क में अगर क्षमता से अधिक डामर पाया जाता है तो उसकी गुणवत्ता बेहतर होती है। इस लिहाज से उक्त सड़क पांच साल तक टिके रहेगी।

घटिया निर्माण की हुई थी शिकायत

निर्माण मटेरियल की लैब रिपोर्ट आना बाकी है। इससे पहले ही इंजीनियरों ने मौके पर की गई जांच के आधार पर निर्माण कार्य को सही करार दिया। वर्तमान समय में पड़ रही भीषण गर्मी के कारण डामर सड़क पर बन रहे पहियों, गाड़ियों के साइड स्टैंड से बन रहे निशान सड़क को पांच साल तक टिके रहने की उम्मीद को कमजोर कर रहा है। गौरतलब है कि शहर में ऐसे कई मार्ग हैं, जहां पर हाल ही में हुए डामरीकरण के उखड़ने और गड्ढे बनने की शिकायतें सामने आ चुकी हैं।

मोबाइल मटेरियल टेस्टिंग लैब से की जांच

नगरीय प्रशासन व विकास जबलपुर की मोबाइल मटेरियल टेस्टिंग लैब में अत्याधुनिक मशीनों की मदद से डामरीकरण के कार्य की गुणवत्ता को परखा गया। इसके लिए सबसे पहले सड़क के बीचोंबीच एक गोलाकार गड्ढा कर डामर का मटेरियल निकाला गया। इसके कुछ हिस्से को एक रोलिंग मशीन में तीन बार डाला गया। मशीन में डाले गए मटेरियल का वजन एक किलो था। मटेरियल में पेट्रोल डालकर बारिक गिट्टियों से बिटुमिन यानी डामर को एक पात्र में निकाला गया। गिट्टी से पूरी तरह डामर निकलने के बाद उसे जलाया गया और दोबारा वजन किया गया। इसमें मटेरियल का वजन एक किलो से 91 ग्राम घटकर 909 ग्राम रह गया। असिस्टेंट इंजीनियर विजय सिंह बघेल ने बताया कि इस टेस्ट को बिटुमिन टेस्ट कहा जाता है, जिसमें डामरी की क्वालिटी और मात्रा देखी जाती है। इस सड़क में क्षमता से अधिक डामर मिला है, जो एक अच्छी रोड के लिए जरूरी है।

सीक्रेट लैब भेजा जाएगा मटेरियल, दस बाद आएगी फाइनल रिपोर्ट

इंजीनियरों ने मौका स्थल पर हुई जांच में गुणवत्ता को बेहतर करार दिया है, लेकिन सड़क से लिए गए मटेरियल का आधा हिस्सा सीक्रेट लैब भेजा जाएगा, जहां दोबारा बिटुमिन टेस्ट होगा और एक सप्ताह से दस दिन के बीच फाइनल रिपोर्ट आएगी। फाइनल रिपोर्ट से पहले सड़क को बेहतर बताने के सवाल पर इंजीनियरों ने बताया कि मौके पर हुई जांच में उन्हें किसी तरह की गड़बड़ी नहीं मिली है। लैब में जांच के बाद भी रिपोर्ट में मामूली अंतर आ सकता है। जांच के दौरान नगर पालिका के इंजीनियरों की टीम मौजूद रही। हालांकि, मौके पर मुख्य नगर पालिका अधिकारी, नपाध्यक्ष, उपाध्यक्ष सहित पार्षद गैरमौजूद रहे।

भारी वाहनों के लिए नहीं है डामरीकरण

कायाकल्प के तहत हो रहे डामरीकरण के बाद सड़क पर बन रहे टायरों के निशान के सवाल पर इंजीनियरों का कहना रहा कि शहर के अंदर बनी रही सड़क भारी वाहनों के लिए नहीं है। चूंकि अभी भीषण गर्मी है, इसलिए सड़क का तापमान भी अधिक है। ऐसे में टायरों के निशान बनना स्वाभाविक है, लेकिन सवाल यह उठ रहा है कि शहर के अंदर भवन निर्माण कार्य अथवा अन्य कार्याें के लिए आमतौर पर जेसीबी मशीन सहित अन्य भारी वाहन प्रवेश करते हैं, ऐसे में सड़क कितने समय तक टिक पाएगी, ये बड़ा सवाल है। कम दूरी की सड़क पर अधिक संख्या में स्पीड ब्रेकर बनाने के सवाल पर इंजीनियर श्री बघेल ने कहा कि ये स्थानीय निकाय की जिम्मेदारी है।

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