भोपाल। राजधानी में स्वच्छ सर्वेक्षण 2023 के सर्वे केंद्रीय टीम कभी भी भोपल आ सकती है। इसको लेकर नगर निगम ने तैयारियां भी शुरु कर दी है। लेकिन अपात्रों को महत्वपूण जिममेदारियां सौपने से स्वच्छ सर्वेक्षण में बुरा असर पड़ेगा। इसका कारण नगरीय प्रशासन विभाग के नियमों को ताक में रखकर अपात्र कर्मचारियों को महत्वपूर्ण प्रभार सौंपना है। जिसकी वजह से नगर निगम में सेनेट्री इंस्पेक्टर अवारा मवेशियों को पकड़ने का काम कर रहे हैं, जबकि क्लर्क और स्टेनाें जैसे कर्मचारियों को स्वच्छता अभियान की कमान सौंपी गई है।
बता दें कि नगर निगम में सहायक स्वास्थ्य अधिकारियों के पास संबंधित जोन की सफाई का जिम्मा होता है। लेकिन निगम के पास पर्याप्त संख्या में एएचओ नहीं होने से जिम्मेदारों ने चहेते कई चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को स्वच्छता प्रभारी बना दिया था। जबकि, यह पद चीफ सैनेटरी इंस्पेक्टर को प्रमोशन के बाद दिया जाता है। वर्तमान में राजीव सक्सेना ही एक मात्र चीफ सैनेटरी इंस्पेक्टर हैं। हालांकि नगरीय प्रशासन विभाग ने तीन वर्ष पहले व्यापमं के माध्यम से सैनेटरी इंस्पेक्टर की भर्ती की थी। इसमें सात सैनेटरी इंस्पेक्टर नगर भोपाल को मिले थे। इनमें छह अभी भी कार्यरत हैं, जो चतुर्थ श्रेणी सफाई कामगार के अंडर में काम कर रहे हैं। जबकि सैनेटरी इंस्पेक्टर का पद तृतीय श्रेणी का है। इधर आयुक्त केवीएस चौधरी ने सहायक स्वास्थ्य अधिकारी राजीव सक्सेना सहित राकेश शर्मा, रविकांत औदिच्य और विजेंद्र गुप्ता के बीच शहर के 21 जोनों को बांट दिया है। ये सभी स्वच्छता सर्वेक्षण 2023 की कमान संभालेंगे। इनमें राजीव सक्सेना ही योग्य अधिकारी हैं, जबकि रविकांत औदिच्य, विजेंद्र गुप्ता और राकेश शर्मा निम्न श्रेणी लिपिक हैं।
नगरीय प्रशासन विभाग ने दिए थे ये निर्देश
नगरीय प्रशासन विभाग ने एक दिसंबर 2020 को नगर निगम आयुक्त को पत्र लिखा था। इसमें निर्देशित किया गया था, कि स्वच्छता निरीक्षकों को मूल पद पर कार्य दिया जाए। वर्तमान में नगर निगम में 10 स्वच्छता निरीक्षक (एसआई) पदस्थ हैं। लेकिन यहां भी स्वास्थ्य अधिकारी और सहायक स्वास्थ्य अधिकारी का प्रभार एलडीसी, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी, सफाई कामगारों को दिया गया है। जबकि पूर्व में इस संबंध में मप्र शासन, नगरीय प्रशासन विकास एवं आवास विभाग के उप सचिव ने तत्काल कार्रवाई के लिए लिखा था।
सेनेट्री इंस्पेक्टर को अन्य विभागों में भेजा
बता दें कि नगर निगम में 10 सेनेट्री इंस्पेक्टर हैं। लेकिन इन्हें दूसरे विभागों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसमें सेनेट्री इंस्पेक्टर मनोज भूमरकर को गोवर्धन परियोजना का जिम्मा सौंपा गया है। इसी तरह राजेश कुरील झील संरक्षण प्रकोष्ठ का काम संभााल रहे हैं। वहीं सेनेट्री इंस्पेक्टर राज कुमार मैना और समुंदर शर्मा भी मूल विभाग से हटकर अन्य विभागों में काम संभाल रहे हैं।
नगरीय प्रशासन विभाग के सचिव से की शिकायत
नगर निगम ने शहर की सफाई व्यवस्था का जिम्मा अयोग्य लोगों के हाथों में दे रखा है। सफाई कामगार एएचओ बने बैठे हैं। इनमें सफाई कामगार, क्लर्क, कुर्क अमीन और ट्रेसर शामिल हैं। इस मामले में एक शिकायत प्रमुख सचिव नगरीय प्रशासन विभाग नीरज मंडलोई से की गई है।
इनका कहना
नगर निगम में कर्मचारियों की योग्यता को देखते हुए ही जिम्मेदारी सौंपी गई। जिन अधिकारियों को स्वच्छता से संबंधित काम दिया गया है, वो बीते कई वर्षों से विभाग में अच्छा काम कर रहे हैं।
– केवीएस चौधरी, आयुक्त नगर निगम
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