शरीर तो नाशवान है किंतु महापुरुष शरीर का त्याग करने के बाद भी सूक्ष्म रूप से अपने भक्तों व शिष्यों के बीच रहकर उनके कल्याण का मार्ग दर्शन प्रशस्त करते रहते हैं -श्री महंत रवींद्रपुरी जी महाराज
जे.डी.गोलानी नासागिर
उल्हासनगर
उल्हासनगर क्र.5 स्थित स्वामी ओंकारानंद आश्रम के पीठेश्वर आचार्य महामंडलेश्वर 108 श्री शिवेंद्र पुरी महाराज मुंबई में ब्रह्मलीन हो गए
इस अवसर पर संत समाज ने उनके ब्रह्मलीन होने पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी।इसमें उल्हासनगर स्थित स्वामी शांतिप्रकाश आश्रम के प्रधान और पीठेश्वर संत श्री देवप्रकाश जी महाराज ने भी अंतिम प्रणाम करते श्रद्धांजलि दी।
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष एवं श्रीपंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी के सचिव महंत रविंद्रपुरी महाराज ने स्वामी शिवेंद्रपुरी महाराज के ब्रह्मलीन होने पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि ब्रह्मलीन स्वामी शिवपुरी महाराज दिव्य महापुरुष थे वह आह्वान अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर के रूप में सनातन धर्म संस्कृति के प्रचार प्रसार में उनका योगदान सदैव अविस्मरणीय रहेगा।

उन्होंने समाज को सेवा का संदेश दिया और भावी पीढ़ी को संस्कारवान बनाकर धर्म के मार्ग पर अग्रसर किया ऐसे दिव्य पुरुष का ब्रह्मलीन होना संपूर्ण सनातन जगत के लिए अपूरणीय छती बताते श्रद्धांजलि दी।
उन्होंने कहां की शरीर तो नाशवान है किंतु महापुरुष शरीर का त्याग करने के बाद भी सूक्ष्म रूप से अपने भक्तों से 100 के बीच रहकर उनके कल्याण का मार्ग दर्शन प्रशस्त करते रहते हैं।
पीठाधीश्वर स्वामी ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी महाराज ने कहा कि ब्रह्मलीन स्वामी शिवेंद्रपुरी महाराज संत समाज के लिए प्रेरणा स्रोत थे उनका जीवन और कृतित्व सदैव समाज को प्रेरणा देता रहेगा।
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के महामंत्री एवं श्री पंच निर्मोही अनी अखाड़े के अध्यक्ष महंत राजेंद्रदास महाराज ने कहा कि समाज को ज्ञान व धर्म की प्रेरणा देने के लिए आजीवन जीवन समर्पित करने वाले ब्रह्मलीन स्वामी शिवेंद्रपुरी महाराज त्याग और तपस्या की साक्षात प्रतिमूर्ति थे, “युवा संतो को”उनके जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए।
श्री पंचदशनाम जूना अखाड़ा 13मढी दशनाम संयास आश्रम हाथागिरी बमबोला परिवार उल्हासनगर की ओर से पीठेश्वर बालयोगी सन्यासी नागा महंत प्रमोदगिरी महाराज, श्री पंचायती अखाड़ा निर्मल के अध्यक्ष श्री महंत ज्ञानदेव महाराज एवं और श्री महंत जसविंदरसिंह महाराज ने कहा कि ब्रह्मलीन स्वामी शिवेंद्र पुरी जी महाराज महान संत बताते श्रद्धांजलि देते कहा कि उन्होंने अखाड़े की परंपराओं का निर्वहन करते हुए सनातन धर्म संस्कृति का प्रचार प्रसार किया और आव्हान अखाड़े को निरंतर प्रगति की ओर अग्रसर किया।

श्रद्धांजलि देने वालों में महामंडलेश्वर स्वामी हंसराम उदासीन महाराज भीलवाड़ा, महामंडलेश्वर स्वामी कपिल मुनि श्री महंत ज्ञानदेव सिंह महाराज, महंत दामोदरदास सतपाल ब्रह्मचारी महंत प्रहलाददास, महंत रामानंद सरस्वती, महंत जसविंदरसिंह, महंत विष्णुदास, महंत रघुवीरदास, महंत सुरेशदास, महंत निर्मलदास, महंत गोविंददास, महंत बिहारीश्री, महंत प्रेमदास, स्वामी ऋषि रामकृष्ण, महंत उपेंद्रप्रकाश, महंत अमनदीपसिंह, स्वामी भगवतस्वरूप, संत देवप्रकाशजी महाराज, महंत प्रमोदगिरी महाराज सहित कई संतों महंतो ने ब्रह्मलीन स्वामी शिवपुरी को महान आत्मा बताते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की।