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किसानों को बड़ा नुकसान,सोयाबीन की फसल खेत में ही अंकुरित होने लगी

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सतीश मेथिल सांचेत रायसेन

क्षेत्र में आठ-दस दिनों से कभी रिमझिम तो कभी झमाझम बारिश हो रही है। इससे रबी फसल में सिंचाई के लिए पानी की आपूर्ति हो गई लेकिन सोयाबीन की फसल को नुकसान हो रहा है। किसानों का कहना है कि जल्दी बारिश नहीं थमी तो इन फसलों को अधिक नुकसान हो सकता है।
क़स्बा सांचेत और आसपास के क्षेत्र में लगातार बारिश से खेतों में सोयाबीन के दाने फलियों में ही अंकुरित होने लगे हैं। किसान दिनेश लोधी चेयरमेन ने बताया कि सोयाबीन की फसल लगाई थी, जो लगभग 10 से 12 दिन पूर्व पककर तैयार हो चुकी थी, लेकिन तब से कभी रिमझिम तो कभी तेज बारिश की वजह से फसल काट नहीं पाए। इससे फसल खेत में ही खराब हो रही है। किसान प्रेम सिंह पटेल बुंदेल पटेल आदि ने बताया कि सोयाबीन, मक्का की फसल पक चुकी है, जल्दी ही बारिश बंद नहीं हुई तो काफी नुकशान होगा दिनेश चेयरमैन ने बताया कि गांव में सोयाबीन की फसल एक सप्ताह पूर्व ही पककर तैयार हो चुकी है, लेकिन लगातार बारिश से सोयाबीन की फलियों में ही दाने अंकुरित होने लगे हैं। सोयाबीन की उम्र लगभग तीन महीने की होती है, लेकिन तीन महीने बाद भी हम कटाई नहीं कर पा रहे हैं।


और ये भी वताया कि इस सीजन में बोवनी का कार्य जून के पहले व दूसरे सप्ताह में हो गया था। सोयाबीन, मक्का की फसलें पककर तैयार हैं। हमें मौसम के खुलने का इंतजार है। मिथुन कुशवाह गोपाल पटेल ने बताया कि सोयाबीन उड़द की फसल को भारी नुकसान हुआ है, क्योंकि कई खेतों में यह फसल कटी हुई है और ऊपर से बारिश हो रही है, ऐसे में फसल पूरी तरह नष्ट हो जाएगी वलवंत सिंह भदौरिया ने बताया कि हमारे यहां सोयाबीन की फसल पूरी तरह नष्ट हो चुकी है। अब हमें रबी फसल से ही आस है। क्षेत्र में इस मानसून सीजन में अब तक 900 मिमी बारिश हो चुकी है।

क़स्बा सांचेत के वरिष्ठ किसान प्रेम सिंह पटेल का कहना है
अभी कटाई नहीं करें किसान
लगातार बारिश से सोयाबीन की गुणवत्ता पर असर पड़ेगा। किसानों को सलाह है कि खेतों में जहां जलजमाव है, वहां निकासी की व्यवस्था करें। साथ ही जब तक मौसम नहीं खुलता है, तब तक कटाई नहीं करें। अगर इस प्रकार के मौसम में कटाई करेंगे तो फसल को और नुकसान होगा।
सांचेत क्षेत्र में किसानों ने आठ से नौ हजार रुपये प्रति क्विंटल की दर से सोयाबीन के बीज खरीदकर बोवनी की थी। 90 दिनों के बाद अब फसल पक चुकी है, लेकिन सतत बारिश से कटाई प्रभावित हो गई है। टाई के वक्त मौसम में आए बदलाव से किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें हैं। सोयाबीन के साथ उड़द व नासिक प्याज की फसल प्रभावित हुई है। खेतों में जलजमाव है और धूप भी नहीं निकल रही है कम समय वाली सोयाबीन सूख चुकी है। बारिश नहीं थमने से सूखी सोयाबीन के फिर से अंकुरित होने की स्थिति बन रही है। यदि आगे भी बारिश का यही हाल रहा तो एक बार फिर किसानों को नुकसान होगा और वे कर्ज के बोझ में दब जाएंगे।

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