मौत की फैक्ट्री बनी नूतन इस्पात, सिलेंडर ब्लास्ट में झुलसे मजदूर की मौत, बरसते पानी में ग्रामीणों ने किया घेराव
अंधाधुंध विस्तार, सुरक्षा ताक पर; 3 माह में विभिन्न उद्योगों में दर्जनभर से अधिक मजदूरों की मौत
सुरेंद्र जैन धरसीवां
एक तरफ भारी प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों को अंधाधुंध विस्तार दिया जा रहा है, तो वहीं औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा की घोर अनदेखी के चलते गरीब श्रमिक असमय काल के गाल में समा रहे हैं। ताजा मामला धरसीवां के जरौदा स्थित नूतन इस्पात फैक्ट्री का है, जो अब मौत की फैक्ट्री बनती जा रही है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार कुछ दिन पूर्व फैक्ट्री में सिलेंडर ब्लास्ट होने से दो श्रमिक भगत निर्मलकर और नीलकंठ साहू गंभीर रूप से झुलस गए थे। उपचार के दौरान भगत निर्मलकर की बुधवार को मौत हो गई। मौत की सूचना मिलते ही जरौदा गांव के ग्रामीण आक्रोशित हो गए। तूफानी बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में ग्रामीण व श्रमिक फैक्ट्री गेट के सामने जमा हो गए और प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
इसी फेक्ट्री में कुछ माह पहले भी हादसे में एक ग्रामीण श्रमिक अनिल यादव की भी मौत हो चुकी है जिससे ग्रामीणों का आक्रोश ओर भी बढ़ गया
मुआवजा नहीं, सुरक्षा चाहिए: सोहन निषाद
सामाजिक कार्यकर्ता सोहन निषाद ने बताया कि फैक्ट्री प्रबंधन मृतक के परिवार को मुआवजा देकर मामला रफा-दफा करना चाहता है उन्होंने कहा कि हम सिर्फ पैसे के लिए प्रदर्शन नहीं कर रहे, यहां काम करने वाले मजदूरों की सुरक्षा सबसे जरूरी है। फैक्ट्री में सुरक्षा उपकरणों की घोर अनदेखी होती है। कुछ माह पूर्व ही इसी फैक्ट्री में अनिल यादव की मौत हुई थी, जिसके छोटे-छोटे बच्चे अनाथ हो गए।

3 माह में 7 मौतें
स्थानीय लोगों के अनुसार बीते दो-तीन माह में ही क्षेत्र की विभिन्न फैक्ट्रियों में हादसों में दर्जन भर से अधिक श्रमिक अपने प्राण गंवा चुके हैं प्रमुख रूप से नूतन इस्पात में दो हादसों में दो मौतें हो चुकी हैं वहीं उरला की थ्री डी इस्पात में तीन और विजय ट्रांसमिशन में दो श्रमिकों की मौत सहित दर्जन भर से अधिक श्रमिक प्राण गंवा चुके बावजूद इसके हेल्थ एंड सेफ्टी विभाग की ओर से अब तक ऐसे ठोस कदम नहीं उठाये गए कि हादसों पर अंकुश लगे
हादसों वाली फैक्ट्रियों के विस्तारीकरण पर लगे रोक
ग्रामीणों ने मांग की है कि किसी भी उद्योग को विस्तार की अनुमति देने से पहले उसके पिछले हादसों का सुरक्षा ऑडिट किया जाए और दोषी प्रबंधन पर कड़ी कार्रवाई हो ऐसे उधोग जहां अक्सर हादसे होते हैं जो सुरक्षा उपायों को गंभीरता से नहीं लेते उनके विस्तारीकरण पर तत्काल रोक लगाई जाए ओर नूतन इस्पात के विस्तारीकरण की जनसुनवाई को भी निरस्त कर विस्तारीकरण पर रोक लगाई जाए