मुकेश साहू दीवानगंज रायसेन
सांची विकासखंड के अंतर्गत ग्राम पंचायत नरखेड़ा में शनिवार से सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ हुआ। कथा आयोजन को लेकर गांव में धार्मिक माहौल बना हुआ है। शुभारंभ अवसर पर बद्री धाम मंदिर से भव्य कलश यात्रा निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। कलश यात्रा में छोटी-छोटी कन्याएं, महिलाएं अपने सर पर कलश रखकर नंगे पर 3 किलोमीटर का चक्कर लगाकर मंदिर पहुंची।
कलश यात्रा बद्री धाम मंदिर से प्रारंभ होकर गांव के मुख्य मार्गों से होते हुए वापस मंदिर परिसर पहुंची। इस दौरान श्रद्धालु धार्मिक भजनों और जयकारों के साथ यात्रा में शामिल हुए। कलश यात्रा के बाद कथा स्थल पर धार्मिक अनुष्ठान किए गए। कलश यात्रा के समापन के पश्चात श्रीमद् भागवत कथा का आरंभ हुआ।
आयोजन समिति के अनुसार कथा का आयोजन 3 से 10 अक्टूबर तक किया जा रहा है। प्रतिदिन दोपहर 1 बजे से शाम 5 बजे तक कथा का वाचन होगा। कथा वाचन कथावाचक राकेश महाराज नीनोद एवं महंत श्री श्री 1008 परम दास त्यागी महाराज द्वारा किया जाएगा।
कथा के दौरान 6 अक्टूबर को भगवान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया जाएगा। मंगलवार को शाम 4 बजे विशेष धार्मिक कार्यक्रम होंगे और भगवान श्रीकृष्ण की जन्म लीला का प्रसंग श्रद्धालुओं को सुनाया जाएगा।
वहीं, गांव में एक अन्य स्थान पर भी श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है, जहां कथावाचक द्वारा भगवान श्रीकृष्ण की जन्म लीलाओं का वर्णन किया गया।श्रीकृष्ण जन्म की आकर्षक झांकी सजाई गई, जहां बाल गोपाल के प्रकट होते ही पूरा पंडाल “हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैयालाल की” के जयघोष से गूंज उठा।
कथावाचक ने श्रीकृष्ण जन्म प्रसंग का विस्तार से वर्णन करते हुए बताया कि भाद्रपद कृष्ण अष्टमी की मध्यरात्रि में मथुरा के कारागार में देवकी और वासुदेव के यहां भगवान श्रीकृष्ण का अवतार हुआ था। उन्होंने बताया कि भगवान ने रोहिणी नक्षत्र, अष्टमी तिथि और रात्रिकाल को विशेष उद्देश्य से चुना था, क्योंकि वे चंद्रवंश में अवतरित हुए थे।
कथा के दौरान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं और कंस के अत्याचारों का मार्मिक वर्णन किया गया। पंडित विजय महाराज ने बताया कि आकाशवाणी से अपनी मृत्यु का संकेत मिलने पर कंस ने अपनी बहन देवकी और वासुदेव को कारागार में बंद कर दिया था तथा उनकी छह संतानों की हत्या कर दी थी। सातवें गर्भ में शेषनाग के अवतार बलराम को योगमाया ने रोहिणी के गर्भ में स्थापित किया और आठवीं संतान के रूप में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ।
जन्मोत्सव के अवसर पर बाल स्वरूप श्रीकृष्ण को श्रद्धालुओं ने गोद में उठाकर दुलार किया और भक्ति गीतों पर जमकर नृत्य किया। कथा स्थल पर कंस के कारागार से बालकृष्ण को नंद बाबा के घर गोकुल ले जाने की मनमोहक झांकी भी प्रस्तुत की गई, जिसने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और देर तक भजन-कीर्तन एवं कृष्ण जन्मोत्सव का आनंद लेते रहे।दोनों आयोजनों के चलते नरखेड़ा में धार्मिक वातावरण बना हुआ है और श्रद्धालुओं में उत्साह देखा जा रहा है।
9 अक्टूबर को कथा का समापन होगा। इसके बाद 10 अक्टूबर को दोपहर 1 बजे से पूर्णाहुति एवं भंडारे का आयोजन किया जाएगा, जो देर शाम तक चलेगा। आयोजकों ने श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर कथा श्रवण करने और भंडारे में प्रसादी ग्रहण करने की अपील की है।