छह से अधिक गांवों का संपर्क प्रभावित, स्कूली बच्चे रोज जान जोखिम में डालकर पहुंच रहे स्कूल
पहले भी ट्रेन की चपेट में आ चुकी है मोटरसाइकिल, छात्र की हो चुकी है मौत
मुकेश साहू दीवानगंज रायसेन
सांची विकासखंड की ग्राम पंचायत अंबाडी में अंबाडी-छपरई मार्ग पर बना रेलवे अंडरपास ग्रामीणों के लिए परेशानी का सबब बन गया है। अंडरपास में लंबे समय से पानी भरा होने से रास्ता बंद है। खास बात यह है कि क्षेत्र में करीब 15 दिन से बारिश नहीं हुई, फिर भी पानी नहीं निकल रहा। अंबाडी, सेमरा, केमखेड़ी, कालीटोर, पिपरई, मुनारा और खेड़ा सहित आसपास के एक दर्जन से अधिक गांवों का आवागमन प्रभावित है। रास्ता बंद होने से ग्रामीण, किसान और स्कूली बच्चे मजबूरी में भोपाल-बीना रेलखंड की तीन पटरियां पार कर रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार रोज करीब 150 से 200 मोटरसाइकिल और बड़ी संख्या में पैदल लोग रेल लाइन पार करते हैं। कुछ दिन पहले पटरी पार करते समय एक मोटरसाइकिल ट्रेन की चपेट में आ गई। चालक बच गया, लेकिन बाइक क्षतिग्रस्त हो गई। इससे पहले एक छात्र की ट्रेन की चपेट में आने से मौत भी हो चुकी है।

आठ साल पहले बंद हुआ था रेलवे फाटक-
ग्रामीणों के अनुसार करीब आठ वर्ष पहले रेलवे विभाग ने अंबाडी-छपरई रेलवे फाटक बंद कर दिया था। इसके विकल्प में अंडरपास बनाया गया, लेकिन जल निकासी की उचित व्यवस्था नहीं होने से बारिश में यह महीनों पानी में डूबा रहता है। करीब तीन महीने पहले रेलवे ने बाउंड्रीवॉल बनाकर रास्ता बंद करने की कोशिश की थी। ग्रामीणों के विरोध और एसडीएम के हस्तक्षेप से काम रुकवाया गया।
स्कूल जाने के लिए बच्चे रोज उठाते हैं जोखिम
अंबाडी और आसपास के गांवों में प्राथमिक स्तर तक ही स्कूल हैं। आगे पढ़ने के लिए बच्चों को पीएम श्री शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय दीवानगंज और पीएम श्री शासकीय हाई स्कूल सेमरा जाना पड़ता है। छात्रा राधिका वंशकार, अरुण और प्रियांशी ने बताया कि अंडरपास में पानी होने से तीन रेलवे लाइन पार करना मजबूरी है। कई बार ट्रेन आने पर बाल-बाल बचे हैं। छात्रा रेणुका लोधी ने बताया कि बारिश में कई महीने पुलिया पानी से भरी रहती है और पैदल व वाहन दोनों से निकलना मुश्किल होता है।

किसान भी परेशान, डीआरएम को आवेदन–
महेंद्र पटेल, पन्नालाल पटेल, आकाश सिंह, लाल सिंह और रघुवीर सिंह मीणा ने बताया कि बारिश होते ही मार्ग बंद हो जाता है और लोग मजबूरी में बाइक पटरी के ऊपर से निकालते हैं। लगातार ट्रेनों की आवाजाही से दुर्घटना का खतरा बना रहता है। किसान और समाजसेवी मुकेश साहू ने बताया कि खेतों तक पहुंचने के लिए कई किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर लगाना पड़ता है, जिससे समय और डीजल-पेट्रोल का खर्च बढ़ता है। अंबाडी सरपंच कुंती रमेश कुमार अहिरवार ने बताया कि रेलवे डीआरएम को फाटक खोलने या वैकल्पिक व्यवस्था के लिए आवेदन दिया है, लेकिन कार्रवाई अब तक नहीं हुई है।