दो दिन की छुट्टियों में हाईवे-18 के पर्यटन स्थलों पर दिनभर रही भीड़, कर्क रेखा पर सेल्फी के लिए राहगीर रोक रहे वाहन; सुविधाओं का अभाव और हादसों का खतरा भी
मुकेश साहू दीवानगंज रायसेन
बारिश के मौसम में सांची विकासखंड के प्राकृतिक पर्यटन स्थलों की खूबसूरती अपने चरम पर है। शनिवार और रविवार की लगातार दो दिन की छुट्टियों का असर क्षेत्र के पर्यटन स्थलों पर साफ दिखाई दिया। भोपाल, विदिशा, बेरसिया सहित आसपास के गांवों और जिलों से बड़ी संख्या में सैलानी परिवार और दोस्तों के साथ घूमने पहुंचे। हाईवे-18 स्थित कर्क रेखा से लेकर हलाली डैम, छोटी पचमढ़ी और ब्लू वाटर तक दिनभर पर्यटकों की आवाजाही बनी रही।
बारिश के बाद हरियाली से ढके पहाड़ी क्षेत्र, बढ़ता जलस्तर, झरने और प्राकृतिक नजारे लोगों को आकर्षित कर रहे हैं। पर्यटक मोबाइल कैमरों में तस्वीरें और वीडियो कैद करते नजर आए। वहीं, क्षेत्र में बढ़ती भीड़ ने स्थानीय पर्यटन की संभावनाओं के साथ सुरक्षा और मूलभूत सुविधाओं की कमी को भी उजागर किया है।

कर्क रेखा बना सेल्फी प्वाइंट, हाईवे पार करते हैं पर्यटक
भोपाल-विदिशा हाईवे-18 पर दीवानगंज नरखेड़ा के समीप स्थित कर्क रेखा इन दिनों पर्यटकों के लिए प्रमुख आकर्षण बनी हुई है। हाईवे से गुजरने वाले राहगीर और स्कूली बच्चे यहां रुककर स्मारक के साथ सेल्फी लेते दिखाई दे रहे हैं। कई परिवार और युवा कर्क रेखा पर खड़े होकर फोटो खींचने के बाद इन्हें सोशल मीडिया पर साझा कर रहे हैं।
भूगोल की किताबों में बचपन से कर्क रेखा के बारे में पढ़ने वाले लोगों के लिए इस स्थान पर पहुंचकर तस्वीर लेना खास अनुभव बन गया है। राजस्थानी पत्थरों से बना चबूतरेनुमा स्मारक लोगों के लिए प्रमुख सेल्फी प्वाइंट बन चुका है।

हालांकि, कर्क रेखा के दोनों ओर बने प्वाइंट पर पहुंचने के लिए पर्यटकों को बार-बार हाईवे पार करना पड़ता है। इससे दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। यहां पार्किंग, छाया, पीने के पानी और शौचालय जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं।
कैंटीन संचालक बोले- रात-दिन उमड़ रही भीड़, लेकिन सुविधाएं नहीं
कर्क रेखा स्थित शुभम संगम कैंटीन के संचालक अनिल जाटव ने बताया कि इन दिनों रात-दिन पर्यटकों की भीड़ बनी हुई है। हाईवे से गुजरने वाले लोग यहां रुककर फोटो खींचते हैं, लेकिन पर्यटन विभाग द्वारा पर्यटकों के लिए कोई पर्याप्त व्यवस्था नहीं की गई है।
उन्होंने बताया कि कर्क रेखा के दोनों प्वाइंट के बीच सड़क पार करने के दौरान हमेशा दुर्घटना का खतरा रहता है। यहां न तो छाया की व्यवस्था है और न ही पीने के पानी या शौचालय की सुविधा। बढ़ती भीड़ को देखते हुए प्रशासन को सुरक्षा और मूलभूत सुविधाओं पर ध्यान देना चाहिए।

21 जून को बनता है नो शैडो जोन
कर्क रेखा को लेकर सबसे अधिक आकर्षण 21 जून को रहता है। इस दिन सूर्य कर्क रेखा के ऊपर लगभग लंबवत स्थिति में होता है, जिसके कारण दोपहर के समय छाया बेहद छोटी दिखाई देती है। इसी खगोलीय घटना के कारण कर्क रेखा से जुड़े स्थानों को आम बोलचाल में नो शैडो जोन कहा जाता है।
हालांकि इन दिनों भी पर्यटकों में कर्क रेखा को लेकर खासा उत्साह देखने को मिल रहा है।
85 प्रतिशत भराव के बाद हलाली डैम पर उमड़ी भीड़
हलाली डैम में करीब 85 प्रतिशत पानी भरने के बाद रविवार को यहां बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचे। भोपाल, विदिशा, बेरसिया और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से परिवार पिकनिक मनाने पहुंचे। डैम के चारों ओर फैली हरियाली, पानी का बढ़ता स्तर और ठंडी हवाओं ने लोगों का मन मोह लिया।
सुबह से शुरू हुआ पर्यटकों के पहुंचने का सिलसिला शाम तक जारी रहा। लोगों ने डैम के आसपास घूमने, फोटो खींचने और प्राकृतिक वातावरण का आनंद लेने में दिन बिताया।

50 फीट ऊंचे झरने और ब्लू वाटर ने खींचा ध्यान
हलाली डैम क्षेत्र के समीप स्थित छोटी पचमढ़ी भी इन दिनों पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बनी हुई है। बारिश के बाद करीब 50 फीट की ऊंचाई से गिरता झरना, चट्टानों के बीच बहता पानी और चारों ओर फैली हरियाली लोगों को रोमांचित कर रही है।
छोटी पचमढ़ी का ब्लू वाटर भी पर्यटकों के बीच विशेष आकर्षण बना हुआ है। ऊपर से गिरता झरने का पानी सफेद दिखाई देता है, जबकि नीचे बने कुंड में पानी का रंग नीला नजर आता है। यही नजारा लोगों को फोटो और वीडियो बनाने के लिए आकर्षित कर रहा है।
प्रशासन की रोक के बावजूद कुंड में उतर रहे सैलानी
छोटी पचमढ़ी क्षेत्र में प्रशासन द्वारा पर्यटकों के प्रवेश और कुंड में जाने पर रोक लगाई गई है। इसके बावजूद कई पर्यटक कुंड में नहाते और सेल्फी लेते दिखाई दिए। तेज बहाव, फिसलन भरी चट्टानों और झरने की ऊंचाई के कारण यहां हादसे का खतरा बना रहता है।
स्थानीय लोगों के अनुसार इस कुंड में पहले भी कई हादसे हो चुके हैं। एक घटना में सात दोस्तों में से तीन की मौत हो गई थी, जबकि भोपाल के एक युवक की भी इसी कुंड में डूबने से जान जा चुकी है। इसके बावजूद पर्यटक सुरक्षा निर्देशों की अनदेखी करते हुए कुंड में उतर रहे हैं।
पुराना रास्ता चालू होने से पर्यटकों को राहत
हलाली डैम के पुराने मार्ग पर सीसी रोड का निर्माण पूरा होने के बाद आम लोगों और वाहनों की आवाजाही शुरू हो गई है। इससे पर्यटकों को राहत मिली है। पहले लोगों को नीचे बने कच्चे रास्ते से होकर गुजरना पड़ता था, जो बारिश के दौरान कई जगह खराब हो गया था और उसमें दरारें भी पड़ गई थीं।
पुराना रास्ता दोबारा शुरू होने से स्थानीय लोगों के साथ पर्यटकों को भी आवागमन में सुविधा मिल रही है।
सुविधाएं बढ़ें तो बन सकता है बड़ा वीकेंड डेस्टिनेशन
लगातार बढ़ती पर्यटकों की संख्या से क्षेत्र में स्थानीय पर्यटन की संभावनाएं मजबूत हुई हैं। यदि कर्क रेखा, हलाली डैम और छोटी पचमढ़ी जैसे स्थलों पर साफ-सफाई, पार्किंग, सुरक्षा, बैठने, पेयजल और शौचालय जैसी सुविधाओं का विस्तार किया जाए तो यह क्षेत्र भोपाल और विदिशा के साथ आसपास के जिलों के लोगों के लिए प्रमुख वीकेंड डेस्टिनेशन बन सकता है।
फिलहाल बारिश के मौसम में उमड़ रही भीड़ यह संकेत दे रही है कि सांची विकासखंड के प्राकृतिक पर्यटन स्थल अब लोगों की पहली पसंद बनते जा रहे हैं।

पर्यटकों का कहना हे
भोपाल, विदिशा, बेरसिया, और आसपास के ग्रामीण अंचलों से सबसे अधिक पर्यटक हलाली पहुंचते हैं। लेकिन सुविधा नहीं होने के कारण पर्यटकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है पर्यटन विभाग को यहां पर पर्यटकों के लिए सुविधा मुहैया कराना चाहिए। ताकि दूर दराज से आए पर्यटकों को सुविधा मिल सके।
सौरभ साहू पर्यटक भोपाल
दीवानगंज, नरखेड़ा के समीप स्थित कर्क रेखा पर भी रोजाना सैलानियों की काफी भीड़ लगी रहती है लेकिन यहां पर सुलभ शौचालय, पीने का पानी और छाया की व्यवस्था नहीं होने के कारण सबसे अधिक परेशानी पर्यटकों को उठाने पड़ती है वही रोड पार करने के लिए भी कोई व्यवस्था नहीं है।
मनोज साहू पर्यटक बेरसिया