पूज्य पितरों को समर्पित सत्संग
उदयपुरा रायसेन। निकटवर्ती ग्राम चंदली में सत्संग, सेवा, सुमरन, संत ग्रंथ, संदेश, मानस यात्रा, के पहुंचने पर काशी प्रसाद तिवारी, सरपंच गया प्रसाद तिवारी एवं उनके परिजनों द्वारा विद्वानों एवं अतिथियों का तिलक पुष्प अर्पित कर उत्साह पूर्वक सम्मान किया, इस अवसर पर निज निवास पर आयोजित अपने पितरों को समर्पित सत्संग सभा का शुभारंभ मानस ग्रंथ के मंगल पूजन एवं हनुमान चालीसा के सामूहिक गायन से प्रारंभ हुआ।
सत्संग सभा में तुलसी मानस प्रतिष्ठान भोपाल के सचिव देवेंद्र रावत ने अपने सार गर्भित उद्बोधन में बताया कि अहंकार मानस रोग है, जो क्रोध से उत्पन्न होता है, क्रोध को जो व्यक्ति अपने वश में नहीं करता वह स्वयं अपने को जला लेता है, समान अग्नि उसी को जलाती है जो उसके पास जाता है, मगर क्रोधाग्नि सारे परिवार और समाज को जला देती है, संत का सानिध्य, ग्रंथ का स्वाध्याय एवं सत्संग श्रवण से ही अहंकार नष्ट होता है।

मानस प्रसंग लक्ष्मण परशुराम संवाद की व्याख्या करते हुए मानस आचार्य सुरेंद्र शास्त्री, धर्माधिकारी राजेंद्र शास्त्री, रामनरेश शास्त्री, नर्मदा प्रसाद रामायणी, लक्ष्मण पचौरी, सुदामा शास्त्री, दीपक शास्त्री, योगेश पांडे , कैलाश दुबे आदि ने अहंकार एवं क्रोध को नष्ट करने के लिए धैर्य, शांति, क्षमा, दया,सद्भाव के साथ सत्संग, सेवा, सुमरन एवं र्निभिमानता जैसे गुण धारण करने के उपायों की चर्चा की।
समाजसेवी बृजगोपाल लोया ने बताया कि संतों, विद्वान के सानिध्य, एवं स्वाध्याय से ही ग्रंथ के पूर्ण रहस्यों को जानकर हम समाज को नई दिशा दे सकते हैं, मानस यात्रा संयोजक अधिवक्ता चतुरनारायण रघुवंशी ने सभा संचालन करते हुए पधारे हुए विद्वानों एवं श्रोताओं का आभार प्रकट किया।
मानस ग्रंथ की मंगल आरती में निरंजन सिंह राजपूत, देवेंद्र सिंह लोधी पूर्व सरपंच, अजब सिंह, चंद्र हंस शर्मा, रंजीत पटेल, झुमकलाल पांडे, माधो सिंह पटेल, राजा राम निवाड़ी, प्रकाश भारके, शोभाराम लोधी सरपंच, राजकिशोर कौरव, रूप सिंह राजपूत, वीरेंद्र सिंह पटेल, सहित बड़ी संख्या में मानस प्रेमी श्रोताओं ने सत्संग श्रवण कर प्रसाद ग्रहण किया।