दीवानगंज पंचायत भवन में GPPFT प्रशिक्षण आयोजित, छह क्लस्टरों को मर्ज कर पांच क्लस्टरों में हो रहा प्रशिक्षण
मुकेश साहू दीवानगंज रायसेन
सांची विकासखंड की ग्राम पंचायतों में विकास योजनाओं को बेहतर तरीके से तैयार करने और पंचायत स्तर पर योजनाबद्ध तरीके से कार्य कराने के उद्देश्य से बुधवार को दीवानगंज पंचायत भवन में ग्राम पंचायत प्लानिंग फैसिलिटेटर टीम (GPPFT) का प्रशिक्षण आयोजित किया गया। प्रशिक्षण में दीवानगंज क्लस्टर के अंतर्गत आने वाली विभिन्न ग्राम पंचायतों के जनप्रतिनिधियों और कर्मचारियों ने भाग लेकर पंचायत प्लानिंग से संबंधित जानकारी प्राप्त की।
प्रशिक्षण मास्टर ट्रेनर बालकृष्ण व्यास द्वारा दिया गया। इसमें ग्राम दीवानगंज के सरपंच गिरजेश नायक, सचिव रामप्रसाद मालवीय सहित पंचायतों के सरपंच, सचिव, सहायक सचिव, जीआरएस, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, स्वच्छताग्राही तथा स्व-सहायता समूहों के सदस्य, अध्यक्ष एवं सचिव शामिल हुए। प्रशिक्षण का उद्देश्य पंचायत स्तर पर स्थानीय जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विकास कार्यों की बेहतर योजना तैयार करना और उन्हें प्रभावी ढंग से लागू करना है।
छह क्लस्टरों को मर्ज कर बनाए गए पांच क्लस्टर
प्रशासनिक आदेश के अनुसार सांची जनपद क्षेत्र में पहले संचालित छह क्लस्टरों को मर्ज कर पांच क्लस्टरों में प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। प्रशिक्षण कार्यक्रम में पंचायतों से जुड़े अलग-अलग स्तर के जिम्मेदार लोगों को उनकी भूमिका और पंचायत प्लानिंग की प्रक्रिया से अवगत कराया जा रहा है।
प्रशिक्षण क्षेत्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायत राज प्रशिक्षण केंद्र, बरखेड़ी कला, भोपाल के प्रशिक्षकों के माध्यम से आयोजित किया जा रहा है। इसके तहत पंचायत स्तर पर योजना निर्माण, विकास कार्यों की प्राथमिकता तय करने और ग्रामीण क्षेत्रों की आवश्यकताओं के अनुसार कार्ययोजना तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है।
TMP Portal पर प्रमाण-पत्र जनरेट करना अनिवार्य
प्रशिक्षण में शामिल सभी प्रशिक्षणार्थियों के लिए TMP Portal पर प्रमाण-पत्र जनरेट करना अनिवार्य किया गया है। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद पोर्टल के माध्यम से प्रमाण-पत्र की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
अधिकारियों के अनुसार पंचायतों के जनप्रतिनिधियों और मैदानी कर्मचारियों को एक ही मंच पर प्रशिक्षण देने से ग्राम पंचायतों में विकास योजनाओं की तैयारी और क्रियान्वयन में बेहतर समन्वय स्थापित होने की उम्मीद है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों की जरूरतों को पंचायत की कार्ययोजना में शामिल करने और प्राथमिकता के आधार पर विकास कार्यों को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।