– ढाई घंटे तक केबिन में फंसा रहा 21 वर्षीय चालक, भारी मशीनरी से रेस्क्यू कर सुरक्षित निकाला गया
– हादसे में गौवंश की मौत, सड़क पर बैठे मवेशियों की सुरक्षा व्यवस्था पर फिर उठे सवाल
सैयद मसूद अली पटेल गैरतगंज रायसेन
जिले के गैरतगंज नगर मे बुधवार देर के टेकापार स्थित हनुमान मंदिर के सामने एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। गिट्टी से भरा डंपर सड़क पर अचानक सामने आए गौवंश को बचाने के प्रयास में अनियंत्रित होकर पलट गया और सड़क किनारे स्थित एक घर में जा घुसा। हादसा इतना गंभीर था कि डंपर का 21 वर्षीय चालक लंकुश लोनी केबिन में बुरी तरह फंस गया। करीब ढाई घंटे तक चले राहत एवं बचाव अभियान के बाद चालक को सुरक्षित बाहर निकाला जा सका।
गौवंश को बचाने के प्रयास में बिगड़ा वाहन का संतुलन
जानकारी के अनुसार, डंपर गिट्टी लेकर टेकापार की ओर से गुजर रहा था। इसी दौरान सड़क पर अचानक गौवंश आ गया। उसे बचाने के प्रयास में चालक ने डंपर को नियंत्रित करने की कोशिश की, लेकिन वाहन का संतुलन बिगड़ गया। डंपर सड़क पर पलटता हुआ पास स्थित एक मकान में जा घुसा। दुर्घटना के बाद चालक केबिन में फंस गया और मौके पर अफरा-तफरी मच गई।

पुलिस और स्थानीय लोगों ने संभाला मोर्चा
हादसे की सूचना मिलते ही थाना प्रभारी डीपी लोहिया पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। स्थानीय लोगों की मदद से तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया। चालक को सुरक्षित निकालने के लिए सड़क निर्माण कंपनी की टीम को भी भारी मशीनरी के साथ बुलाया गया।
हाइवा, हाइड्रा, जेसीबी और पोकलेन की सहायता से डंपर को सावधानीपूर्वक सीधा किया गया। करीब ढाई घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद चालक लंकुश लोनी को केबिन से सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
चालक की जान बची, गौवंश की मौत
भीषण हादसे के बावजूद राहत की बात यह रही कि चालक की जान बच गई। लंकुश को मामूली चोटें आई हैं और उसे उपचार के लिए सिविल अस्पताल गैरतगंज ले जाया गया, जहां उसका उपचार जारी है। वहीं हादसे में सड़क पर आए गौवंश की मौत हो गई।
सड़क पर गौवंश आखिर क्यों? व्यवस्था पर गंभीर सवाल
इस हादसे ने एक बार फिर सड़कों पर खुले में घूमने और बैठने वाले गौवंश की समस्या को सामने ला दिया है। सवाल यह है कि सड़कों पर रहने वाले गौवंश के लिए सुरक्षित व्यवस्था क्यों नहीं की जा रही है?
रात के समय सड़क पर बैठे या अचानक वाहन के सामने आ जाने वाले मवेशी वाहन चालकों के लिए गंभीर खतरा बन जाते हैं। चालक यदि उन्हें बचाने का प्रयास करता है तो वाहन के अनियंत्रित होने की आशंका रहती है और यदि अचानक ब्रेक लगाता है तो पीछे से आने वाले वाहनों की टक्कर का खतरा बना रहता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि गौवंश को केवल सड़क से हटाना पर्याप्त नहीं है। उनके लिए सुरक्षित आश्रय, पर्याप्त चारा-पानी और नियमित निगरानी की व्यवस्था जरूरी है। नगर एवं ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कों पर घूमने वाले मवेशियों की पहचान कर उन्हें सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की व्यवस्था की जानी चाहिए।

हादसे के बाद लोगों ने की स्थायी व्यवस्था की मांग
टेकापार हादसे के बाद स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि मुख्य सड़कों और आबादी वाले क्षेत्रों में खुले में घूमने वाले गौवंश को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाई जाए। साथ ही रात के समय संवेदनशील स्थानों पर विशेष निगरानी और सड़क सुरक्षा के इंतजाम किए जाएं, ताकि एक ओर गौवंश की जान सुरक्षित रहे और दूसरी ओर वाहन चालकों तथा राहगीरों की जिंदगी भी खतरे में न पड़े।
यह हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि सड़क सुरक्षा और गौवंश की उचित व्यवस्था—दोनों पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत की ओर इशारा करता है।