अंबाडी में तीन साल पहले जर्जर भवन का पिलर गिरने से बच्ची की मौत, एक बच्चा हुआ था गंभीर घायल; दो साल पहले भवन तोड़ने का आवेदन, अब तक कार्रवाई नहीं
दीवानगंज का करीब 65 साल पुराना जर्जर उप स्वास्थ्य केंद्र भी बना खतरा, 2019 में कलेक्टर ने गिराने के दिए थे आदेश, सात साल बाद भी नहीं हटा भवन
मुकेश साहू दीवानगंज रायसेन
बारिश के इस दौर में सांची विकासखंड के दीवानगंज और अंबाडी क्षेत्र में जर्जर भवन लोगों के लिए गंभीर खतरा बने हुए हैं। अंबाडी में पुराना माध्यमिक शाला भवन, कच्चा जर्जर मकान और दीवानगंज प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र परिसर में करीब 65 साल पुराना जर्जर उप स्वास्थ्य केंद्र का भवन लंबे समय से हादसे को न्योता दे रहे हैं। सबसे चिंताजनक स्थिति यह है कि इन जर्जर भवनों के आसपास रोजाना बच्चे, ग्रामीण और मरीजों की आवाजाही रहती है।
अंबाडी के पुराने माध्यमिक शाला भवन की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि इसकी दीवारें और अन्य हिस्से कभी भी गिर सकते हैं। भवन के आसपास स्कूल जाने वाले छोटे बच्चे खेलते हैं और इसी रास्ते से होकर आवागमन करते हैं। वर्तमान में कुछ ही दूरी पर माध्यमिक शाला की कक्षाएं भी संचालित हो रही हैं। बारिश के कारण भवन की हालत और खराब होने से ग्रामीणों में भय बना हुआ है।
तीन साल पहले हो चुका है दर्दनाक हादसा
ग्रामीणों के अनुसार करीब तीन वर्ष पहले इसी जर्जर भवन की बाउंड्रीवाल के गेट का पिलर खेल रहे दो बच्चों के ऊपर गिर गया था। इस हादसे में एक मासूम बच्ची की मौत हो गई थी, जबकि एक बच्चा गंभीर रूप से घायल हुआ था। इस दर्दनाक घटना के बाद भी पुराने भवन को पूरी तरह हटाया नहीं गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि हादसे के बाद भी यदि समय रहते भवन को नहीं हटाया गया तो भविष्य में इससे भी बड़ा हादसा हो सकता है। खासकर स्कूल खुलने के बाद लंच के समय बच्चे भवन के आसपास खेलते हैं, जिससे खतरा और बढ़ जाता है।

दो साल पहले आवेदन, निरीक्षण के बाद भी कार्रवाई नहीं
ग्राम पंचायत अंबाडी द्वारा करीब दो वर्ष पहले पुराने जर्जर माध्यमिक शाला भवन को तोड़ने के लिए रायसेन कलेक्टर कार्यालय में आवेदन दिया गया था। इसके बाद 8 अगस्त को नायब तहसीलदार नियति साहू और पटवारी अलका द्वारा भवन का निरीक्षण भी किया गया था। निरीक्षण के दौरान लोगों को जर्जर भवन के अंदर प्रवेश नहीं करने की समझाइश दी गई थी।
इसके बावजूद भवन को हटाने की कार्रवाई अब तक नहीं हो सकी है। ग्रामीणों का सवाल है कि जब भवन को खतरनाक माना जा चुका है और प्रशासनिक स्तर पर निरीक्षण भी हो चुका है तो फिर इसे हटाने में इतनी देरी क्यों की जा रही है।
आम रास्ते के पास खड़ा जर्जर कच्चा मकान
अंबाडी की पीछे वाली गली में भी एक दो मंजिला कच्चा मकान जर्जर अवस्था में खड़ा है। मकान की छत तक नहीं है और बारिश के कारण इसकी कच्ची दीवारें कमजोर हो चुकी हैं। मकान के आसपास से ग्रामीणों और बच्चों का आना-जाना लगा रहता है।
ग्रामीणों के अनुसार सरपंच द्वारा मकान मालिक से भवन हटाने के लिए कहा गया था, लेकिन अभी तक मकान जस का तस खड़ा है। ऐसे में बारिश के बीच इसकी दीवारें भरभराकर गिरने की आशंका बनी हुई है।
65 साल पुराना उप स्वास्थ्य केंद्र भी बना जानलेवा खतरा
वहीं दीवानगंज प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र परिसर में स्थित पुराना उप स्वास्थ्य केंद्र का भवन भी गंभीर खतरा बना हुआ है। स्थानीय लोगों के अनुसार यह भवन करीब 65 साल पुराना है और इसकी दीवारों में जगह-जगह बड़ी दरारें आ चुकी हैं। भवन की छत पर पेड़-पौधे तक उग आए हैं, जिससे इसकी जर्जरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
दीवानगंज स्वास्थ्य केंद्र में करीब 35 गांवों से प्रतिदिन सैकड़ों मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। अस्पताल परिसर में स्वास्थ्य विभाग का स्टाफ भी रहता है। इसके बावजूद जर्जर भवन को अब तक नहीं हटाया गया है। मरीज कई बार इसी जर्जर भवन के आसपास बैठते हैं और लोग अपने वाहन भी इसके पास खड़े कर देते हैं।
2019 में कलेक्टर ने दिए थे भवन गिराने के आदेश
सबसे गंभीर बात यह है कि पुराने उप स्वास्थ्य केंद्र भवन को गिराने के आदेश करीब सात वर्ष पहले ही दिए जा चुके हैं। 14 अक्टूबर 2019 को आदेश क्रमांक 6460/एस.सी. शाखा/89/2019 के माध्यम से रायसेन कलेक्टर द्वारा भवन को गिराने के निर्देश दिए गए थे।
आदेश में भवन की स्थिति को रिपेयरिंग योग्य नहीं बताते हुए यह उल्लेख किया गया था कि भवन कभी भी गिर सकता है और इससे जनहानि की आशंका है। इसके बाद भवन को गिराने की जिम्मेदारी लोक निर्माण विभाग को दी गई थी। लेकिन वर्षों बीत जाने के बाद भी भवन आज तक खड़ा है।
मरीजों और स्टाफ की सुरक्षा पर सवाल
स्वास्थ्य केंद्र परिसर में रोजाना बड़ी संख्या में मरीज और उनके परिजन पहुंचते हैं। जर्जर भवन से लगकर ही मरीजों के बैठने और वाहनों के खड़े होने की स्थिति बनी रहती है। ऐसे में यदि बारिश के दौरान भवन की दीवार या छत का हिस्सा गिरता है तो बड़ी जनहानि हो सकती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन को किसी बड़े हादसे का इंतजार करने के बजाय तत्काल दोनों स्थानों के जर्जर भवनों को हटाने की कार्रवाई करनी चाहिए।
ग्रामीण बोले- हादसा होने के बाद नहीं, पहले जागे प्रशासन
अंबाडी निवासी गोलू साहू और रवि साहू ने बताया कि उनका घर स्कूल के जर्जर भवन के सामने ही है। बच्चे रोजाना भवन के आसपास खेलते हैं। तीन साल पहले हुए हादसे के बाद से हमेशा डर बना रहता है कि कहीं फिर कोई घटना न हो जाए। प्रशासन को जल्द कार्रवाई कर बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए।
वहीं स्थानीय निवासी हरिओम साहू ने बताया कि कच्चा मकान क्षतिग्रस्त अवस्था में है। उसकी छत भी नहीं है और बारिश के कारण दीवारें लगातार कमजोर हो रही हैं। मकान के पास से आम रास्ता है, जहां से बच्चे और ग्रामीण गुजरते हैं। किसी भी समय दीवार गिरने से बड़ा हादसा हो सकता है।
अंबाडी सरपंच कुंती रमेश कुमार अहिरवार ने कहा कि पुराने माध्यमिक शाला भवन को तोड़ने के लिए पंचायत द्वारा करीब दो वर्ष पहले रायसेन कलेक्टर कार्यालय में आवेदन दिया गया था। तहसील स्तर से निरीक्षण भी किया गया, लेकिन अभी तक भवन नहीं तोड़ा गया है।
दीवानगंज सरपंच गिरजेश नायक ने भी जर्जर भवन को लेकर चिंता जताई है। ग्रामीणों की मांग है कि प्रशासन तत्काल सभी जर्जर भवनों का दोबारा निरीक्षण कराकर उन्हें हटाने की कार्रवाई करे।
ग्रामीणों का कहना है कि जब प्रशासन को पहले से पता है कि भवन खतरनाक हैं, एक स्थान पर पहले ही मासूम की जान जा चुकी है और दूसरे भवन को गिराने के लिए कलेक्टर के आदेश भी जारी हो चुके हैं, तो फिर कार्रवाई के लिए किसी और हादसे का इंतजार क्यों किया जा रहा है?