शव यात्रा लेकर कीचड़ वाले रास्ते से जाने को मजबूर
अनुराग शर्मा सीहोर
आजादी के 79 वर्ष बाद भी मध्य प्रदेश के आष्टा विधानसभा क्षेत्र की ग्राम पंचायत गुवाड़िया वाज्याफ्त का ग्राम धनखेड़ी विकास के नाम पर उपेक्षा का दंश झेल रहा है। कागजों में गाँव को भले ही ‘स्मार्ट’ घोषित कर दिया गया हो, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि आज भी ग्रामीण आदिम युग जैसी जिंदगी जीने को मजबूर हैं
मूलभूत सुविधाओं का घोर अभाव
गांव में न तो पक्की सड़कें हैं, न नालियां और न ही पीने के पानी की माकूल व्यवस्था मानसून के दौरान कच्चे रास्ते इतने कीचड़ में तब्दील हो जाते हैं कि एम्बुलेंस या वाहन गाँव तक नहीं पहुँच पाते, जिससे मरीजों को अस्पताल ले जाना दूसभर हो जाता है। बारिश का पानी नालियां न होने से सीधे लोगों के घरों में घुस रहा है। वहीं, गर्मियों के दिनों में पीने के पानी के लिए महिलाओं को 2 किलोमीटर का पैदल सफर तय करना पड़ता है। स्थानीय विधायक गोपाल इंजीनियर और प्रशासनिक अमले के दावों के विपरीत, यहाँ विकास के नाम पर केवल कागजी खानापूर्ति ही नजर आती है।
फर्जीवाड़े और करोड़ों के घोटाले का आरोप
ग्रामीणों का स्पष्ट आरोप है कि सरकारी फाइलों और ऑनलाइन रिकॉर्ड्स में फर्जी फोटो चिपकाकर अफसरों व ठेकेदारों ने मिलकर करोड़ों रुपये का घोटाला किया है। धरातल पर एक रुपये का काम नहीं हुआ, जबकि कागजों में विकास योजनाएं पूरी दिखाई गई हैं। ग्रामीण अब यह सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर विकास के नाम पर आया पैसा गया कहाँ?
उग्र आंदोलन की चेतावनी
गांव की इस बदहाली से आक्रोशित होकर ग्रामवासियों ने अब सीधे प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। ग्रामीणों ने सीहोर कलेक्टर से निम्नलिखित मुख्य मांगें की हैं:
SIT जांच: कलेक्टर सीहोर द्वारा विगत 10 वर्षों में गाँव में हुए सभी विकास कार्यों की SIT से निष्पक्ष जांच कराई जाए।
कड़ी कार्रवाई: दोषी अधिकारियों और ठेकेदारों पर धारा 420 व भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज हो।
त्वरित कार्य: 15 से 30 दिनों के भीतर गांव में पक्की सड़क, नाली निर्माण और पेयजल योजना का काम शुरू किया जाए।
ग्रामवासियों ने अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि यदि निर्धारित समय में उनकी मांगों को पूरा नहीं किया गया और दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो पूरा धनखेड़ी गाँव कलेक्ट्रेट का घेराव करने और सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होगा।