आदिवासी समाज ने उठाई सर्वसुविधायुक्त मुक्तिधाम की मांग
मनोज बैरागी सरदारपुर धार
धार जिले की दसई ग्राम पंचायत से हाल ही में एक संवेदनशील मामला सामने आया है। दरअसल, सर्पदंश (सांप के काटने) के कारण आदिवासी भील समाज के एक 7 से 8 वर्षीय बालक, देवेंद्र (पिता: ईश्वर कटारा) का असमय निधन हो गया। जब परिजन और समाजजन बालक के अंतिम संस्कार के लिए पहुंचे, तभी अचानक तेज बारिश शुरू हो गई। बारिश से बचाव का कोई पक्का इंतज़ाम न होने के कारण परिजनों को तिरपाल (पल्ली) की छांव में जलती चिता को बचाते हुए दाह संस्कार करना पड़ा। इस दृश्य का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद यह मामला चर्चा में आ गया।
50 वर्षों से पारंपरिक स्थल पर हो रहा अंतिम संस्कार
आदिवासी समाज के प्रबुद्धजनों और ग्रामीणों का कहना है कि वे पिछले लगभग 50 से अधिक वर्षों से इसी पारंपरिक स्थान पर अपने समाज का अंतिम संस्कार करते आ रहे हैं। उनका कहना है कि कृषि उपज मंडी का निर्माण इस स्थान पर बाद में हुआ है।
अंतिम संस्कार के दौरान बारिश के कारण हुई भारी असुविधा को देखते हुए समाजजनों ने शासन-प्रशासन से गुहार लगाई है कि उनकी वर्षों पुरानी आस्था और परंपरा को ध्यान में रखते हुए इस स्थान पर एक सर्वसुविधायुक्त एवं पक्के शेड वाले मुक्तिधाम का निर्माण कराया जाए, ताकि भविष्य में किसी भी परिवार को ऐसी दुखद स्थिति में परेशान न होना पड़े।
पंचायत प्रशासन का रुख और समाधान की ओर कदम
यद्यपि तकनीकी रूप से ज़मीन मंडी बोर्ड की है, लेकिन स्थानीय ग्रामीणों की ज़रूरतों और मानवीय दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए यदि ग्राम पंचायत, मंडी बोर्ड और ज़िला प्रशासन आपस में समन्वय बनाएं, तो इसका एक स्थायी समाधान निकल सकता है:
भूमि हस्तांतरण या एनओसी
मंडी बोर्ड यदि अपनी अप्रयुक्त ज़मीन का कुछ हिस्सा मुक्तिधाम के लिए शासन की अनुमति से हस्तांतरित कर दे या अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी कर दे, तो वहां पक्का शेड बनाया जा सकता है।
*सहानुभूतिपूर्वक निर्णय:* आदिवासी समाज की लंबे समय से चली आ रही परंपरा और इस दुखद घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन जल्द ही उचित कदम उठा सकता है।
उम्मीद की किरण
यह घटना जहां एक ओर परिवार के गहरे दुख और बारिश की वजह से हुई असुविधा को दर्शाती है, वहीं दूसरी ओर इसने वर्षों पुराने भूमि और बुनियादी सुविधा से जुड़े मुद्दे को उजागर कर दिया है। पूरी उम्मीद है कि स्थानीय प्रशासन और जन प्रतिनिधि मिलकर जल्द ही इसका कोई सुखद और सम्मानजनक समाधान निकालेंगे, ताकि क्षेत्र के हर नागरिक को सम्मानजनक अंतिम संस्कार का अधिकार मिल सके।
इनका कहना हे
ग्राम पंचायत दसई में पहले से ही एक सर्वसुविधायुक्त मुक्तिधाम निर्मित है। हालांकि, आदिवासी समाज जिस स्थान पर पक्के मुक्तिधाम के निर्माण की मांग कर रहा है, वह वर्तमान में मंडी बोर्ड के आधिपत्य (स्वामित्व) की भूमि है।”
कन्हैयालाल परमार सरपंच पंचायत दसई