क्या तीन दशक बाद शहडोल संसदीय क्षेत्र को मिल सकता है केन्द्र मे प्रतिनिधित्व
मनोज कुमार द्विवेदी
शहडोल संसदीय क्षेत्र की लोकप्रिय सांसद श्रीमती हिमाद्री सिंह का नाम एक बार फिर तेजी से चर्चा मे है। शांत ,धीर – गंभीर ,मृदु स्वभाव, धार्मिक – आध्यात्मिक संस्कारों के साथ विनम्र भाव से प्रशंसा – निंदा के प्रति निस्पृह रहने वाली हिमाद्री सिंह की गिनती सर्वथा गैर – विवादित, सक्रिय और पार्टी विचारधारा के प्रति समर्पित सांसद के रुप मे है।
2019 और 2024 मे रिकार्ड मतों से ऐतिहासिक विजय प्राप्त करके दो बार सांसद निर्वाचित होने के बावजूद अपने पिता पूर्व केन्द्रीय मंत्री स्व दलवीर सिंह और पूर्व सांसद स्व राजेश नन्दिनी सिंह से मिली राजनैतिक – सामाजिक और संस्कार जनित विरासत का रंचमात्र भी अहंकार नहीं है।
लगभग सात वर्ष के कार्यकाल मे पुत्री को जन्म देने ,उसके लालन – पालन और कोविड विभिषिका का कठिन समय निकाल दें तो वे निरंतर अनूपपु्र जिले के अमरकंटक – बेनीबारी से कटनी के बडवारा और शहडोल जिले के जयसिंहनगर ,उमरिया के चंदिया से लेकर अनूपपु्र के कोतमा,बिजुरी, वेंकटनगर तक लोगों के सुख – दुख मे शामिल होती रही हैं ।
संसदीय क्षेत्र के विकास कार्यों , सामाजिक गतिविधियों मे सक्रियता के अलावा केन्द्र और प्रदेश सरकार / संगठन द्वारा सौंपे गये प्रत्येक दायित्व के निर्वहन मे उनका समर्पण निर्दोष और प्रशंसनीय है।
पिछले लगभग 30 सालों मे स्व दलवीर सिंह के बाद शहडोल संसदीय क्षेत्र जैसे बडे जनजातीय क्षेत्र को केन्द्र सरकार मे प्रतिनिधित्व नहीं मिला है।
हिमाद्री सिंह मे वह सभी खूबियां हैं जो एक कुशल , योग्य ,शिक्षित ,ईमानदार राजनेता मे होना चाहिये।
वह एक युवा, सुयोग्य , ईमानदार जनजातीय महिला चेहरा हैं। जिन्हें केन्द्र सरकार मे मंत्री बनाए जाने का दूरगामी संदेश मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड , बिहार जैसे राज्यों मे जाएगा।
मध्यप्रदेश मे सांसद हिमाद्री सिंह जनजातीय समाज का स्थापित युवा उर्जावान नेतृत्व है। देखना होगा कि भारतीय जनता पार्टी और केन्द्र का शीर्ष नेतृत्व उनका किस तरह से सदुपयोग करता है।