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35 से 40 गांवों की सेहत भगवान भरोसे, दीवानगंज अस्पताल में एक डॉक्टर पर पूरा सिस्टम, मरीज इलाज के लिए भटकने को मजबूर

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 मुकेश साहू दीवानगंज रायसेन

सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के लाख दावे कर रही है, लेकिन दीवानगंज प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की तस्वीर इन दावों की हकीकत बयां कर रही है। 35 से 40 गांवों की आबादी इस अस्पताल पर निर्भर है, लेकिन यहां सिर्फ एक मेडिकल ऑफिसर पदस्थ हैं। नतीजा यह है कि अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को कई बार डॉक्टर नहीं मिलते और बिना इलाज के ही वापस लौटना पड़ता है।

दीवानगंज प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ डॉ. पलक पटेरिया की ड्यूटी सप्ताह में दो से तीन दिन सांची सिविल अस्पताल में भी लगाई जाती है। ऐसे में जिस अस्पताल में पहले से ही केवल एक डॉक्टर है, उसकी ड्यूटी सांची लगाने पर वहां मरीजों का इलाज आखिर किसके भरोसे होगा। यह सवाल अब ग्रामीण खुलकर पूछ रहे हैं।

पोस्टमार्टम के लिए 31 किलोमीटर दूर रायसेन दौड़, अस्पताल में मरीजों की लंबी प्रतीक्षा

समस्या यहीं खत्म नहीं होती। दीवानगंज अस्पताल में पोस्टमार्टम की कोई व्यवस्था नहीं है। किसी भी मृतक का पोस्टमार्टम कराने के लिए 31 किलोमीटर दूर रायसेन जिला अस्पताल जाना पड़ता है और इसके लिए डॉ. पटेरिया को भी रायसेन जाना पड़ता है। इस दौरान अस्पताल में आने वाले मरीज घंटों डॉक्टर का इंतजार करते हैं और अंततः मायूस होकर लौट जाते हैं।

झोलाछाप डॉक्टरों का बढ़ रहा सहारा

डॉक्टर की अनुपलब्धता के कारण कई ग्रामीण मजबूरी में झोलाछाप चिकित्सकों का सहारा लेने को विवश हैं। इससे मरीजों की जान जोखिम में पड़ने की आशंका बढ़ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि जब 35 से 40 गांवों की स्वास्थ्य व्यवस्था केवल एक डॉक्टर के भरोसे चल रही है, तो सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ आखिर लोगों तक कैसे पहुंच सकता है। दीवानगंज अंबाडी सेमरा जमुनिया सहित आसपास के

ग्रामीणों की मांग—दो स्थायी डॉक्टर और पोस्टमार्टम सुविधा मिले

स्थानीय रहवासियों ने स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि दीवानगंज प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में कम से कम दो स्थायी डॉक्टरों की तत्काल नियुक्ति की जाए और अस्पताल में पोस्टमार्टम की सुविधा भी शुरू की जाए, ताकि मरीजों और परिजनों को अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े।

विडंबना यह है कि स्वास्थ्य विभाग शायद यह मानकर चल रहा है कि एक ही डॉक्टर तीन-तीन जिम्मेदारियां निभा सकता है—दीवानगंज में इलाज, सांची में ड्यूटी और रायसेन में पोस्टमार्टम। लेकिन इस व्यवस्था का खामियाजा आखिर कब तक 35 गांवों के मरीज भुगतते रहेंगे। अब देखना होगा कि जिम्मेदार अधिकारी इस गंभीर समस्या का समाधान करते हैं या फिर दीवानगंज अस्पताल में मरीज यूं ही डॉक्टर का इंतजार करते रहेंगे।

इनका कहना हे 

दीवानगंज गांव के आसपास 35 से 40 गांव पड़ते हैं। सभी गांव के कई मरीज अस्पताल पहुंचते हैं। लेकिन डॉक्टर नहीं होने के कारण उन सभी को झोला छाप डॉक्टर के पास जाकर इलाज करना पड़ता है जिससे उनकी जान को खतरा बना रहता है। दीवानगंज में दो डॉक्टर उपस्थित होना चाहिए ताकि एक की अनुपस्थिति में दूसरा इलाज कर सके।

गिरजेश नायक सरपंच दीवानगंज 

अब सांची अस्पताल में डॉक्टर बाहर से आने लगे हैं अब मेरी ड्यूटी परमानेंट दीवानगंज अस्पताल में रहेगी। पहले सांची अस्पताल में कोई डॉक्टर नहीं होने के कारण मेरी ड्यूटी सांची लगाई जाती थी लेकिन अब नहीं लगाई जा रही है। इस हफ्ते से रेगुलर दीवानगंज अस्पताल में ड्यूटी लग रही है

पलक पटेरिया डॉक्टर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र दीवानगंज

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