तारकेश्वर शर्मा
“मध्य प्रदेश के बरगी डैम से आई एक तस्वीर आज सिर्फ एक खबर नहीं रही… वो एक एहसास बन गई है, एक दर्द बन गई है, जो हर संवेदनशील दिल को भीतर तक चीर रही है।
तेज़ आंधियों और उफनती लहरों के बीच जब प्रकृति अपना रौद्र रूप दिखा रही थी, तब एक मां अपने बच्चे को सीने से लगाए मौत से जंग लड़ रही थी।वो जानती थी कि हालात उसके खिलाफ हैं… फिर भी उसने हार नहीं मानी।लाइफ जैकेट का सहारा था, उम्मीद की एक आखिरी डोर थी…लेकिन किस्मत को शायद कुछ और ही मंजूर था।जब ये दर्दनाक हादसा हुआ, तब सिर्फ जिंदगियां ही नहीं गईं…एक मां का सपना टूटा, एक बच्चे की मासूम दुनिया खत्म हो गई।और फिर सामने आई वो तस्वीर—जिसमें एक मां अपने बच्चे को सीने से ऐसे लगाए हुए है, जैसे अभी भी उसे दुनिया की हर बुरी नजर से बचा रही हो…
जैसे कह रही हो— “मैं हूं ना, कुछ नहीं होने दूंगी…”लेकिन इस बार… मौत जीत गई।प्रकृति की इस निर्दयी मार ने उनकी सांसें तो छीन लीं,मगर एक मां और बेटे के रिश्ते को अलग नहीं कर पाई।
ये तस्वीर सिर्फ एक हादसे की गवाही नहीं देती…ये उस ममता की कहानी कहती है, जो अपनी आखिरी सांस तक अपने बच्चे के लिए लड़ती रही।आज हर कोई ये सोचने पर मजबूर है—क्या सच में कोई ताकत मां के प्यार से बड़ी हो सकती है?बरगी डैम की ये खामोश लहरें अब भी उस कहानी को दोहरा रही हैं…जहां एक मां हार गई, लेकिन उसकी ममता अमर हो गई।