– भाजपा का सियासी संतुलन, विरोधियों को निगम-मंडल में मिली जगह
– भाजपा ने मप्र मेें सिंधिया विरोधी माने जाने वाले चेहरों को भी अहम जिम्मेदारी देकर सभी खेमों को साधने की कोशिश की है
रंजीत गुप्ता शिवपुरी
मप्र की मोहन सरकार ने निगम मंडलों में राजनीतिक ताजपोशी शुरू कर दी है। ग्वालियर-चंबल संभाग से जिन नेताओं को नियुक्ति हुई है, उसमें केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की विरोधियों को भी जगह मिली है। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के प्रभाव वाले गुना-शिवपुरी संसदीय क्षेत्र में भाजपा ने सियासी संतुलन साधते हुए निगम-मंडल-बोर्ड में नियुक्तियां की हैं। पार्टी ने संगठन के नेताओं के साथ सिंधिया विरोधी माने जाने वाले चेहरों को भी अहम जिम्मेदारी देकर सभी खेमों को साधने की कोशिश की है। भाजपा ने गुना-शिवपुरी के पूर्व सांसद केपी यादव को मध्य प्रदेश राज्य खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति निगम का अध्यक्ष नियुक्त किया है। वहीं कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए वरिष्ठ नेता रामनिवास रावत को वन विकास निगम का अध्यक्ष बनाया गया है। दोनों ही नेता सिंधिया विरोधी खेमे के माने जाते रहे हैं।
पार्टी का संदेश सभी को साथ लेकर चलना-
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि भाजपा को लगता है कि ग्वालियर-चंबल संभाग में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का वर्चस्व जरूर है, लेकिन कांग्रेस से आए नेताओं और पार्टी के निष्ठावान कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय बना रहे। निगम-मंडल में नियुक्तियों के जरिए भाजपा ने संदेश दिया है कि वह सभी को साथ लेकर चलेगी। विरोधियों को पद देकर भाजपा ने सिंधिया समर्थकों और उनके विरोधियों के बीच तालमेल बैठाने की कोशिश की है। इन नई नियुक्तियों को लेकर जानकारों का कहना है कि पार्टी का संकेत है कि ग्वालियर-चंबल की राजनीति में सिंधिया अहम हैं, लेकिन संगठन सर्वोपरि है और सभी का सम्मान होगा।
केपी यादव का कट गया था टिकट जबकि रामनिवास को उपचुनाव में मिली थी हार-
गुना-शिवपुरी संसदीय सीट पर लोकसभा चुनाव के दौरान वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में केपी यादव ने ज्योतिरादित्य सिंधिया को हराया था। इसके बाद 2024 के लोकसभा चुनाव में केपी यादव को इस संसदीय क्षेत्र से टिकट नहीं मिला और सिंधिया स्वयं यहां से सांसद निर्वाचित हुए। अब यादव को निगम में अध्यक्ष बनाकर भाजपा ने सियासी संतुलन बनाने का संदेश दिया है। वहीं दूसरी ओर श्योपुर जिले के नेता रामनिवास रावत भी सिंधिया के कट्टर विरोधी रहे हैं। रामनिवास ने कांग्रेस छोड़कर विजयपुर से उपचुनाव लड़ा लेकिन सिंधिया यहां पर प्रचार के लिए नहीं आए। प्रचार से दूरी का असर यह रहा है कि रामनिवास को विजयपुर उपचुनाव में हार का सामना करना पड़ा। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा की यह रणनीति 2028 के चुनावी दौर को देखते हुए है। 2027 में पंचायत चुनाव, उसके बाद नगर पालिका चुनाव और 2028 में विधानसभा चुनाव होने हैं। चुनावी तैयारियों से पहले पार्टी सत्ता संतुलन साध रही है ताकि मूल कार्यकर्ताओं में नाराजगी न रहे।