डबहारा गांव में बालिका का विवाह रुकवाया, परिजनों ने 18 वर्ष बाद ही विवाह का दिया आश्वासन
रंजीत गुप्ता शिवपुरी
चाइल्ड लाइन पर प्राप्त सूचना के आधार पर शिवपुरी विकासखंड के ग्राम डबहारा में महिला एवं बाल विकास विभाग तथा पुलिस की संयुक्त टीम ने त्वरित कार्रवाई कर एक नाबालिग बालिका को वधु बनने से बचा लिया। सूचना के आधार पर टीम ग्राम डबहारा पहुंची और बालिका के आयु संबंधी दस्तावेजों का परीक्षण किया। जांच में बालिका की उम्र 16 वर्ष 7 माह होना पाई गई, जो विवाह की निर्धारित आयु से कम है।
समझाइश एवं आश्वासन
मौके पर माता-पिता एवं परिजनों को बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 के कानूनी प्रावधानों एवं सजा की जानकारी दी गई। टीम ने स्पष्ट किया कि लड़की की विवाह की न्यूनतम आयु 18 वर्ष है और इससे पहले विवाह कराना दंडनीय अपराध है। समझाइश के बाद परिजनों ने बालिका का विवाह 18 वर्ष की आयु पूर्ण होने के बाद ही करने का लिखित आश्वासन दिया।
प्रशासन का संदेश
जिला प्रशासन ने दोहराया कि बाल विवाह सामाजिक कुरीति के साथ-साथ कानूनन अपराध है। इससे बालिका का शारीरिक, मानसिक एवं शैक्षणिक विकास बाधित होता है। अक्षय तृतीया एवं आगामी विवाह मुहूर्तों पर जिले में सभी आयोजनों की सघन निगरानी की जा रही है।
अपील
नागरिकों से अनुरोध है कि बाल विवाह की किसी भी जानकारी को तुरंत चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 या डायल 112 पर देकर बच्चों के भविष्य को उन्नत बनाने में सहयोग करें। सूचना देने वाले की पहचान गोपनीय रखी जाएगी।
विवाह बच्चों का खेल नहीं है
विवाह एक सामाजिक विकास का हिस्सा है, कोई बच्चों का खेल नहीं है। कानून में इसे बच्चों के साथ क्रूरता माना गया है। बाल विवाह एक सामूहिक अपराध है,इसलिए कानून में आयोजकों के साथ सहयोगी और सेवा प्रदाताओं को भी जिम्मेदार मानते हुए उन्हें भी समान अपराधी माना गया है।
– राघवेंद्र शर्मा, बाल संरक्षण अधिकारी, जिला शिवपुरी
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