गेहूं की फसल निकालने के बाद किसान मूंग की फसल की तैयारी करने लगे, मूंग के लिए कई किसान खेतों में दे रहे हैं पानी
मुकेश साहू दीवानगंज रायसेन
गेहूं कटाई का सीजन चल रहा है। कई किसानों की गेहूं की कटाई भी हो चुकी है।गेहूं कटाई के बाद दीवानगंज क्षेत्र मे कई किसान मूंग की फसल लेने के लिए अपने खेतों मे पानी देना प्रारंभ कर दिया है। निनोद गांव के किसान सबसे ज्यादा दीवानगंज क्षेत्र में मूंग की फसल पैदा करते हैं। हलाली डैम का पानी नजदीक होने के कारण पानी फेरने में परेशानी नहीं होती है। मूंग की फसल में मेहनत कम और मुनाफा ज्यादा होता है। अगर किसान गेहूं कटाई के बाद अपने खेत को सही तरीके से इस्तेमाल कर मूंग लगा देते है तो किसान को फायदा ही फायदा होता है।
आमतौर पर मध्य प्रदेश के कई किसान गेहूं के बाद खेतों में मूंग लगाते हैं, लेकिन धान की खेती शुरू होने में अभी समय है, ऐसे में किसान अपने खेतों में 3 महीने तक मूंग की खेती लेने लगे हैं। मूंग की फसल ऐसी है, जो गेहूं के काटने के बाद खाली पड़े खेतों में लगा दी जाती है। धान की खेती से पहले ही फसल तैयार हो जाती है।इससे किसानों को मुनाफा ज्यादा होता है इसमें लागत भी काफी कम है।
70 दिनों में तैयार हो जाती हैं फसल
मूंग एक अल्पकालिक गरमा फसल है, जो 60 से 70 दिनों में तैयार हो जाती है। इसमें बीज के अलावा खाद और पानी काफी कम मात्रा में लगता है। 60 से 70 दिनों में तैयार होकर बेहतर आमदनी देती है। साथ ही इसकी डंठल को खेतों में छोड़ कर अगर जुताई कर दी जाए, तो एक बेहतर जैविक खाद भी तैयार हो जाती है, जो अगली फसल धान के लिए काफी बेहतर काम करती है।
दीवानगंज क्षेत्र के किसान गेहूं की कटनी के बाद खाली पड़े खेतों का सदुपयोग करते हुए किसान मूंग की फसल को लगा रहे हैं। वहीं एक एकड़ में चार से पांच क्विंटल मूंग की उपज होती है। जिससे 30 से 35 हजार की आमदनी हो रही है। किसान गेहूं की कटनी के तुरंत बाद मूंग की फसल लगा देता है तो जून तक फसल तैयार हो जाती है। मूंग बोने से पहले किसान अपने खेत की दो-तीन बार जुताई करता है। इसके बाद फसल लगा देता है। यहां फसल वही किसान लगा सकता है जिसके पास पर्याप्त पानी होता है। क्षेत्र में जिन किसानों के पास पर्याप्त पानी है वह मूंग फसल ले रहे हैं।