दोनों हाथों से साइकिल चलाकर उज्जैन महाकाल के दर्शन को निकले दिव्यांग भक्त
मुकेश साहू दीवानगंज रायसेन
भोपाल-विदिशा हाईवे-18 पर गुरुवार सुबह एक ऐसा दृश्य देखने को मिला जिसने राहगीरों को आश्चर्यचकित कर दिया। शारीरिक रूप से दिव्यांग होने के बावजूद कर्नाटक के बेलगाम जिले के सोनादत्ती निवासी मंजूनाथ अपने दोनों हाथों के सहारे विशेष साइकिल चलाते हुए उज्जैन महाकाल के दर्शन के लिए रवाना हुए।
मंजूनाथ चलने-फिरने में असमर्थ हैं, लेकिन उनकी अटूट श्रद्धा और दृढ़ संकल्प उन्हें लगातार देशभर के तीर्थ स्थलों की यात्रा करने के लिए प्रेरित कर रहा है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2021 में शुरू हुई उनकी धार्मिक यात्रा आज भी निरंतर जारी है। इस दौरान वे हरिद्वार, मथुरा, आगरा, खंडवा, उज्जैन, शेगांव के गजानन महाराज धाम, पंढरपुर, कोल्हापुर महालक्ष्मी मंदिर, त्र्यंबकेश्वर, रामेश्वरम और कन्याकुमारी सहित अनेक प्रमुख तीर्थ स्थलों की यात्रा कर चुके हैं।
विशेष बात यह है कि मंजूनाथ अपनी पूरी यात्रा केवल साइकिल के माध्यम से करते हैं और उसे भी दोनों हाथों के सहारे चलाते हैं। हाल ही में अयोध्या धाम की यात्रा पूरी करने के बाद वे अब बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन के लिए निकले हैं।
उनकी साइकिल भी लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। साइकिल पर करीब 20 फीट ऊंचे धार्मिक झंडे लगे हुए हैं। साथ ही उन्होंने साइकिल पर छोटे-छोटे पेड़-पौधे और अपनी दैनिक उपयोग की आवश्यक सामग्री भी रखी हुई है, जिससे उनकी यह यात्रा और भी अनोखी दिखाई देती है।
हाईवे से गुजरने वाले लोग मंजूनाथ को देखकर रुक गए और उनकी हिम्मत, संघर्ष तथा भक्ति भाव की सराहना की। उनकी यह यात्रा साबित करती है कि जब मन में अटूट विश्वास और मजबूत इरादे हों तो शारीरिक सीमाएं भी इंसान के रास्ते की बाधा नहीं बन पातीं।