बाजार रहे बंद,सड़कों पर पसरा सन्नाटा
बम्होरी रायसेन ।अस्पताल में डॉक्टर सहित पूरा स्टाफ और समुचित स्वास्थ्य सेवाओं की मांग को लेकर बम्होरी में चल रहा जन आंदोलन दूसरे दिन भी शांति पूर्ण रूप में जारी रहा। रविवार सुबह से ही ग्रामीण झंडा चौक पर डटे रहे, लेकिन आश्चर्यजनक और शर्मनाक स्थिति यह रही कि पूरे दिन भर प्रशासन का एक भी जिम्मेदार अधिकारी आंदोलनकारियों से बात करने नहीं पहुंचा। इससे ग्रामीणों का आक्रोश और भड़क उठा।

जनप्रतिनिधियों के खुले समर्थन के बावजूद प्रशासन की यह चुप्पी साफ तौर पर जनहित की अनदेखी और संवेदनहीनता को दर्शाती है। आंदोलन के चलते पूरा बाजार बंद रहा, व्यापार पूरी तरह ठप हो गया और व्यापारियों को लाखों रुपये के नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। इसके बावजूद प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है।
ग्रामीणों का कहना है कि बम्होरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कागजों में तो चालू है, लेकिन हकीकत में यह बिना डॉक्टर के लावारिस पड़ा हुआ है।
वहीं एक लेटर तेजी वायरल हो रहा है जिसमें दर्शाया गया है एक डॉक्टर एक वर्ष के लिए बम्होरी के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पदस्थ किया गया था लेकिन स्वास्थ विभाग के अधिकारियों ने बम्होरी का आदेश को बदल कर डॉक्टर शमाईला कोकब को खरबई के अस्पताल में नियुक्त कर दिया गया
भारतीय सार्वजनिक स्वास्थ्य मानक (IPHS) के अनुसार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में कम से कम—
1–2 डॉक्टर
3 नर्स
1 लैब टेक्नीशियन
1 फार्मासिस्ट
10–15 अन्य कर्मचारी
होना अनिवार्य है, जबकि बम्होरी में इन मानकों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। वर्षों से डॉक्टर और स्टाफ की भारी कमी के कारण क्षेत्र के दर्जनों गांवों की जनता मजबूरन निजी अस्पतालों में महंगा इलाज कराने को विवश है।
आंदोलनकारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने तत्काल मौके पर पहुंचकर डॉक्टर की नियुक्ति, पूरा स्टाफ और जरूरी संसाधन उपलब्ध नहीं कराए, तो आंदोलन किया जाएगा।
भविष्य में किसी भी अप्रिय स्थिति की पूरी जिम्मेदारी प्रशासन एवं स्वास्थ विभाग की होगी ।