मुकेश साहू दीवानगंज रायसेन
बसंत पंचमी के आगमन के साथ ही ग्रामीण अंचलों में प्रकृति ने मानो उत्सव का श्रृंगार कर लिया है। खेतों में लहलहाते सरसों के पीले फूल दूर-दूर तक फैली सुनहरी चादर जैसे दिखाई दे रहे हैं। ठंडी हवाओं के बीच खिली सरसों न केवल किसानों के चेहरे पर मुस्कान ला रही है, बल्कि पूरे इलाके को प्राकृतिक सौंदर्य से भर रही है।दीवानगंज ,अंबाडी ,सेमरा सहित ग्रामीण अंचलों में 23 जनवरी को बसंत पंचमी मनाई जाएगी।ग्रामीण अंचलों में जगह-जगह कई कार्यक्रम होंगे।
बसंत पंचमी को ज्ञान, विद्या और नई शुरुआत का पर्व माना जाता है। इसी के साथ यह ऋतु परिवर्तन का भी संकेत देता है। जैसे ही बसंत आया, खेतों में सरसों पूरी तरह खिल उठी। पीले फूलों की खुशबू और मधुमक्खियों की गुनगुनाहट से गांवों का माहौल खुशनुमा हो गया है।
निवास मीणा, सुरेश साहू, दिगपाल नायक, महेंद्र नारायण आदि
किसानों का कहना है कि इस बार मौसम अनुकूल रहने से फसल अच्छी होने की उम्मीद है। सरसों की भरपूर पैदावार से आर्थिक स्थिति मजबूत होने की आशा है। वहीं ग्रामीणों और राहगीरों के लिए ये खिले हुए खेत आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं, लोग रुक-रुक कर प्राकृतिक नज़ारों को निहारते नजर आ रहे हैं। कई राहगीर खेत में खड़े होकर अपनी सेल्फी लेकर मोबाइल में अपलोड कर रहे हैं।
बसंत पंचमी के साथ ही पीले वस्त्र, पूजा-अर्चना और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की रौनक भी बढ़ गई है। कुल मिलाकर, सरसों के फूलों ने बसंत के स्वागत को यादगार बना दिया है और गांव-देहात में उल्लास का माहौल बना हुआ है।