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राष्ट्र की अवधारणा क्या है, इसके सिद्धांत क्या हैं, इन्हें समझने की आवश्यकता- योगेश जी भारद्वाज

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– शिवपुरी नगर में विभिन्न स्थानों पर हुए हिंदु सम्मेलन

– हिंदु सम्मेलन में सामाजिक एकजुटता, राष्ट्रहित और सांस्कृतिक संरक्षण पर जोर

रंजीत गुप्ता शिवपुरी

शिवपुरी जिले में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्ष पूर्ण होने पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में जिले में विराट हिंदू सम्मेलन को आयोजन भी किया जा रहा है। रविवार को जिले में विभिन्न स्थानों पर हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया गया। रविवार को शिवपुरी नगर में आर्य समाज बस्ती, जल मंदिर बस्ती, मनियर बस्ती में भव्य हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस सम्मेलन में बड़ी संख्या में हिंदू भाई-बहनों की गरिमामयी उपस्थिति रही।
शिवपुरी नगर के आर्य समाज बस्ती में आयोजित हिंदू सम्मेलन को संबोधित करते हुए वैदिक संस्थान के योगेश जी भारद्वाज द्वारा राष्ट्र के महत्व पर प्रकाश डाला गया। सम्मेलन को संबोधित करते हुए योगेश जी भारद्वाज ने बताया कि पहले सभी लोगों को राष्ट्र किसे कहते हैं, इसे समझने की आवश्यकता है। उन्होंने विस्तार से यहां पर राष्ट्र का महत्व बताया। भारतीय संस्कृति में किस तरह से वेदों का महत्व है और राष्ट्र के लिए चार घटक किस तरह से उपयोगी हैं। इसके बारे में उपस्थित लोगों को विस्तार से जानकारी दी। राष्ट्र की अवधारणा क्या है इसके सिद्धांत क्या हैं और हमें भारतीय संस्कृति को किस तरह समझने की आवश्यकता है इसके बारे में जानकारी दी। सम्मेलन में उपस्थित लोगों को योगेश जी ने एकजुटता का पाठ पढ़ाते हुए एक राष्ट्र के रूप में अपनी संस्कृति को समझने की आवश्यकता पर जोर दिया। सम्मेलन में हिंदू समाज की एकता, सांस्कृतिक चेतना एवं राष्ट्रहित से जुड़े विषयों पर सार्थक विचार-विमर्श हुआ।

शिवपुरी नगर में ही हिंदू सम्मेलनों की श्रृंखला के अंतर्गत जल मंदिर बस्ती में एक भव्य हिंदू सम्मेलन का आयोजन हर्षोल्लास एवं धूमधाम के साथ संपन्न हुआ। सम्मेलन में नगर एवं आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में सकल हिंदू समाज के नागरिकों ने सहभागिता की। सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता जिला प्रचारक जितेंद्र गोस्वामी ने कहा कि भारत भूमि और सनातन हिंदू धर्म में जन्म लेना हम सभी के लिए सौभाग्य का विषय है। उन्होंने कहा कि पराधीनता के काल में हिंदू समाज के भीतर हीन भावना उत्पन्न हो गई थी, जिसके परिणाम स्वरूप हिंदू पहचान को लेकर संकोच की स्थिति बन गई थी। हिंदुत्व के गौरव को पुन: स्थापित करने के उद्देश्य से वर्ष 1925 में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार द्वारा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की गई। श्री गोस्वामी ने कहा कि आज भी समाज को पूर्ण रूप से जागृत करने की आवश्यकता है। इसी चेतना को जागृत करने हेतु देशभर में हिंदू सम्मेलनों का आयोजन किया जा रहा है।
इसके अलावा जिले ग्रामीण अंचल में सुरवाया, पोहरी, बैराड़ में रविवार को विराट हिंदू सम्मेलनों का आयोजन किया गया। इन हिंदू सम्मेलन में मुख्य वक्ताओं ने हिंदू एकता पर बल दिया। सम्मेलन में समाज की सामूहिक शक्ति के प्रकटीकरण पर जोर दिया गया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने सामाजिक एकजुटता, राष्ट्रहित और सांस्कृतिक संरक्षण जैसे विषयों पर अपने विचार रखे। सम्मेलन के दौरान धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक मुद्दों पर चर्चा की गई। आयोजन स्थल को भगवा ध्वजों और बैनरों से सजाया गया था, जिससे पूरे क्षेत्र में उत्सव जैसा वातावरण बना रहा।

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