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पच्चीस साल बेमिसाल::पृथक हुआ तो छत्तीसगढ़ का धरसीवां बना कई राज्यों के बेरोजगारों की रोजी रोटी का सहारा

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– सड़क बिजली पानी शिक्षा स्वास्थ्य के क्षेत्र में तेजी से हुआ विकास

सुरेंद्र जैन धरसीवां

आज हम जब पृथक छत्तीसगढ़ की रजत जयंती मना रहे हैं तो यह भी हमें जानना जरूरी है कि इन पच्चीस सालों में हमने क्या पाया ओर जब पृथक नहीं हुआ था तब किन विकराल समस्याओं से जूझते थे ग्रामीण यदि राजधानी रायपुर से लगे धरसीवा की हम बात करें तो बीते पच्चीस सलोने धरसीवा ने बहुत तीव्र गति से विकास किया है और सिर्फ विकास ही नहीं किया अपितु छत्तीसगढ़ सहित पड़ोसी राज्यों के हजारों बेरोजगारों को दो वक्त की रोजी रोटी का सहारा भी धरसीवां क्षेत्र बना है।

सर्वप्रथम यदि हम स्वास्थ्य के क्षेत्र को ही ले लें तो स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति पच्चीस साल पहले बहुत गंभीर थी मुख्यालय में एक पुराना जर्जर स्वास्थ्य केंद्र था जहां न डॉक्टर थे न स्वास्थ्य सुविधाएं थी दिन में तो डॉक्टर मिलते थे लेकिन रात्रि में डॉक्टर मिलना मुश्किल रहता था इसके कुछ ग्रामीण गर्भवती महिलाओं को अपने प्राण तक गंवाने पड़े थे लेकिन पृथक छत्तीसगढ़ बनने के बाद धीरे धीरे स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार हुआ ओर आज धरसीवा में एक विशाल शासकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र है जिसमें पर्याप्त चिकित्सक तो हैं ही साथ ही ग्रामीणों को हर संभव इलाज की सुविधाएं मिल रही हैं कोरोना काल में भी धरसीवां में किसी की अस्पताल में मौत का कलंक नहीं लगाने दिया बीएमओ डॉ विकास तिवारी कहते हैं कि सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ सभी जरूरतमंद मरीजों को मिलता रहे यह उनकी पहली प्राथमिकता है

कभी घुटनों तक कीचड़ में स्कूल जाना मुश्किल था
सड़क के मामले में भी धरसीवा ने पच्चीस सालों में बहुत तरक्की की है जिन गांवों के ग्रामीण बच्चे बारिश में घुटनों तक कीचड़ के चलते स्कूल नहीं जा पाते थे आज उन गांवों तक प्रधानमंत्री ग्राम सड़क बन चुकी है और कई गांव में स्कूल भी बन चुके हैं सांकरा से चिखली कुम्हारी होते पठारीडीह तक पीएम सड़क ने गांवों की किस्मत बदल दी है तो वहीं रायपुर बिलासपुर हाइवे सांकरा से सिमगा तक आज सिक्स लाइन बन चुका है सड़को के विकास से गांवों के ग्रामीणों की कई समस्याएं हल हुई हैं

बेमिसाल पच्चीस साल पड़ोसी राज्यों के बेरोजगारों को भी धरसीवा ने दिया रोजगार
राजधानी रायपुर से लगे धरसीवां ने न सिर्फ धरसीवां ओर समूचे छत्तीसगढ़ वासियों को अपितु पड़ोसी राज्यों के भी हजारों बेरोजगारों को रोजगार का साधन देकर उन्हें रोजी रोटी का सहारा दिया है
पच्चीस सालों में धरसीवां क्षेत्र में हुए औद्योगिक विकास ने जिस तीव्र गति से औद्योगिक विकास किया उससे सिलतरा उरला औद्योगिक विकास से हजारों लोग रोजगार से लगे है

भविष्य में सरकार से अपेक्षाएं
अविभाजित मध्यप्रदेश के समय छत्तीसगढ़ के क्या हाल थे कितनी विकराल समस्याएं थी और पृथक छत्तीसगढ़ बनने के बाद बीते पच्चीस सालों में क्या तरक्की की यह जानने के बाद भविष्य में सरकार से क्या आशा है यह भी जानना जरूरी है
छत्तीसगढ़ विशेषकर रायपुर जिला के आसपास औद्योगिक क्षेत्रों से लगे ग्रामीण अंचलों के लोगों को सरकार से यही आशा है कि सर्वप्रथम प्रदूषण पर अंकुश लगे क्योंकि औद्योगिक इकाइयों का प्रदूषण बीमारियों को जन्म दे रहा है दूसरा यह की ग्रामीणों के लिए औद्योगिक क्षेत्र सिलतरा के सांकरा में हर बीमारी के उपचारार्थ एक बड़ा निःशुल्क हॉस्पिटल औद्योगिक इकाइयों के सीएसआर से निर्मित हो सभी गांवों में सड़क बत्ती निकास नालियां सड़कें बने बच्चो की पढ़ाई के लिए सीएसआर फंड से एक बेहतरीन स्कूल का निर्माण सांकरा में हो

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