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डिजिटल माध्यमों ने उच्च शिक्षा को विश्वव्यापी बनाया,क्लासरूम टीचिंग का कोई विकल्प नहीं 

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भोपाल । “डिजिटल माध्यमो ने उच्चशिक्षा को विश्वव्यापी बनाया है,केंद्र एवं राज्य सरकारें भी इसे प्रोत्साहित कर रही हैं,प्रशासकीय कार्यों में डिजिटल माध्यमो का प्रचलन तेजी से बड रहा है,क्लास रूम टीचिंग का कोई विकल्प नहीं है फिर भी समय की आवश्यकता के अनुसार डिजिटल माध्यमो से उच्च शिक्षण पद्धतियों का तेजी से विकास हो रहा है*उक्त विचार विषय विशेषज्ञों ने ‘उच्च शिक्षा में नवीन शिक्षण पदधति और डिजिटल माध्यम:अवसर और चुनोतियाँ’विषय पर आयोजित राष्ट्रीय वेबीनार में व्यक्त किये .

बाबूलाल गौर शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय भेल भोपाल में ‘उच्च शिक्षा में नवीन शिक्षण पदधति और डिजिटल माध्यम:अवसर और चुनोतियाँ’ विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय वेबीनार उच्च शिक्षा विभाग म प्र शासन के सौजन्य से आयोजित किया गया.जिसमे विशिष्ट वक्ता डा विक्रम सिंह राजकीय डिग्री कालेज टप्पल अलीगढ ने वताया कि डिजिटल माध्यमों पर केंद्र और राज्य सरकारे सजग हैं ,शोध कार्यों में डिजिटल माध्यमों का अद्वतीय योगदान है , 2015से यह प्रयास प्रारम्भ हुए थे स्वयं पोर्टल,मूक,इ-कंटेंट,वर्चुअल क्लासेज,इ,-लाइब्रेरी जैसे प्लेटफ़ॉर्म लोकप्रिय हुए हैं.दिव्यांगों को उच्च शिक्षा के लिए डिजिटल माध्यम वरदान साबित हो रहा है ,इसमें चुनोतियाँ भी हैं क्लासरूम टीचिंग का कोई विकल्प नहीं है लेकिन समय कि आवश्यकता डिजिटल माध्यमों से उच्च शिक्षण पद्धति का ही है ।

दिल्ली विश्वविध्यालय श्यामलाल कालेज के विषय विशेषज्ञ डा. आकाश के सोनी ने अपने उद्बोधन में कहा कि कोविड के बाद डिजिटल माध्यमो से उच्च शिक्षा का तेजी से विकास हुआ है ,यह भोगोलिक सीमाओं से परेशिक्षा प्रभावशाली और रोचक ढंग से देने का माध्यम बन गया है ,यह तुलनात्मक रूप से सस्ता माध्यम भी है इसमे लचीलापान,नवाचार और गलोब्लिजेशन जैसी विशेषताएं भी हैं ,राष्ट्रीय शिक्षा नीति में क्रेडिट सिस्टम डिजिटल शिक्षा की सार्थक पहल है ,फिलिप्ड क्लासरूम,ए आई,ईलर्निग तथा प्रोजेक्ट आधारित शिक्षा इसके बेहतर स्वरूप हैं .

राष्ट्रीय वेबीनर में सभी का स्वागत करते हुए अपने उदबोधन में प्राचार्य डॉ संजय जैन ने कहा कि डिजिटल माध्यमों ने उच्च शिक्षा को विश्वव्यापी बनाया है

इंजीनियरिंग,कामर्स ,मेडिकल ,आर्किटेक्चर ,कला, संगीत, नृत्य ,फोटोग्राफी आदि में डिजिटल माध्यमो ने उच्च शिक्षा को मानवजाति के लिए और अधिक उपयोगी बना दिया है . संयोजक डॉ समता जैन ने बताया कि इस राष्ट्रीय वेबीनार में महाराष्ट्र ,छतीसगढ़, हरियाणा ,उत्तरप्रदेश ,राजस्थान ,गुजरात तथा मध्यप्रदेश के अतिरिक्त विदेश से भी लगभग दो सौ से अधिक प्रतिभागियों ने सहभागिता की है जिनमें प्राचार्य, प्राध्यापक ,शोधार्थी, डिजिटल मीडिया कर्मी आदि शामिल रहे तथा 28 शोध पात्र प्राप्त हुए हैं जिनकी स्मारिका एवं चयनित शोध पत्रों की पुस्तक प्रकाशित कि जायेगी.प्रारम्भ में आईक्यूएसी कोआरडीनेटर डॉ कीर्ती श्रीवास्तव ने महाविद्यालय का परिचय देते हुए कहा कि यह कालेज भेल क्षेत्र में होने के कारण मिनी भारत का प्रतिनिधित्व करता है,शोधिर्थियो द्वारा शोध पत्रों का वाचन एवं जिज्ञासाओं का विषय विशेषज्ञों द्वारा समाधान भी किया गया .अंत में होमसाइन्स विभागाध्यक्ष डॉ मीता बादल द्वारा विषय विशेषज्ञों , शोधार्थियो़ सहित सभी सहभागिता करने वालों का आभार व्यक्त किया गया।

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