भोपाल से सुनील सोन्हिया की रिपोर्ट
नवरात्रि उत्सव के अंतिम दिन दशमी पर बंगाली समाज की महिलाओं द्वारा पारंपरिक सिंदूर खेला का आयोजन किया गया। देवी दुर्गा की प्रतिमा को विदाई देने से पूर्व महिलाओं ने एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर मंगलकामनाएँ दीं। इस अवसर पर महिलाएँ पारंपरिक लाल-बॉर्डर वाली सफेद साड़ी पहनकर सजधज कर आईं और हाथों में थाली सजाकर मां दुर्गा की आरती की।

बाबड़िया कला स्थित काली बाड़ी मे सिंदूर खेला कार्यक्रम में महिलाओं ने न केवल देवी मां को सिंदूर अर्पित किया बल्कि एक-दूसरे के माथे और गाल पर सिंदूर लगाकर वैवाहिक जीवन की सुख-समृद्धि और दीर्घायु की कामना की। माहौल भावुक होने के साथ-साथ आनंदमय रहा।

कार्यक्रम के समापन पर ढाक की थाप और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने सभी को झूमने पर मजबूर कर दिया। बंगाली समाज के वरिष्ठ सदस्यों ने बताया कि यह परंपरा सदियों से चली आ रही है और समाज को एकजुट करने का प्रतीक है इस अवसर पर हिन्दू समाज की महिलाओं ने भी बंगाली महिलाओं के साथ सिन्दूर खेला